कनाडा के रक्षामंत्री को खालिस्तान समर्थक बताने के बाद हुए विरोध के बीच सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उनसे मिलने से इंकार कर दिया है। वे कहते हैं कि मैं अपने सैद्धांतिक स्टैंड पर कायम हूं। वह किसी भी खालिस्तान समर्थक से नहीं मिलेंगे।
कैप्टन ने कहा कि सज्जन के अलावा कनाडा के कई मंत्री और बड़े नेताओं की सहानुभूति भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों के साथ थीं। एक लोकतांत्रिक देश होने के नाते भारत अभिव्यक्ति की आजादी में विश्वास रखता है, लेकिन वह निजी तौर पर किसी खालिस्तान समर्थक से नहीं मिलेंगे।
सज्जन यहां कांफ्रेंस मीटिंग करें, दरबार साहिब जाएं, उनका स्वागत है पर वह सज्जन से नहीं मिलेंगे। उनके पास पुख्ता सूचना है कि सज्जन भी अपने पिता और वर्ल्ड सिख ऑर्गेनाइजेशन के मेंबर कुंदन सज्जन की तरह खालिस्तान समर्थक हैं। राज्य सरकार सज्जन को पूरी सुरक्षा मुहैया कराएगी।
यह भी यकीनी बनाएगी कि प्रोटोकॉल के मुताबिक उन्हें ट्रीटमेंट मिले। कैप्टन ने कहा कि सज्जन के अलावा कई अन्य मंत्री और सांसद भी खालिस्तान समर्थक हैं। जिनमें नवदीप बैंस, अमरजीत सोही, सुख धालीवाल, दर्शन कंग, राज गरेवाल, हरिंदर मल्ही, रॉबी सहोता, जगमीत सिंह, रणदीप सरी शामिल हैं। जिन्हें खालिस्तान मूवमेंट के प्रति झुकाव के लिए जाना जाता है।
दल खालसा और आम आदमी पार्टी पर कैप्टन ने पलटवार किया
कैप्टन अमरिंदर सिंह
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सज्जन से न मिलने के एलान का विरोध करने वाले दल खालसा और आम आदमी पार्टी पर कैप्टन ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि ये लोग देश विरोधी ताकतों के हाथों में खेल रहे हैं। सज्जन के विरोध पर कनाडा के स्टैंड पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएम ने कहा कि उन्हें इसकी परवाह नहीं है कि सज्जन समेत अन्य कनाडियन उनके स्टैंड के बारे में क्या सोचते हैं।
बल्कि, उन्हें पंजाब की चिंता है, जिसने आतंकवाद के दौर में बहुत कुछ झेला है। उस दौर में 35 हजार निर्दोष लोगों की जानें गईं। सज्जन जैसे लोग उस दौर में यहां से न सिर्फ भाग कर विदेश में सेटल हो गए, बल्कि कट्टरवादियों की फिलॉसफी का समर्थन करके उन्हें प्रोत्साहित करते रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने हमेशा पंजाब के मुद्दों को अहमियत दी है।
चाहे ब्लू स्टार पर कांग्रेस छोड़ना हो या एसवाईएल पर लोकसभा से इस्तीफा देना। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी से ऐसी ही प्रतिक्रिया की उम्मीद थी, क्योंकि अरविंद केजरीवाल का कट्टरपंथियों के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर पहले ही साबित हो गया था। केजरीवाल ने चुनाव में कट्टरपंथियों और नक्सलियों को टारगेट किया पर असफल रहे।