उन्होंने अपने ट्वीट में पंजाब में धार्मिक आधार पर जनसंख्या के आंकड़े भी पेश किए, जिसके अनुसार सूबे में जनसंख्या के लिहाज से हिंदू-सिख आबादी के बाद दूसरे नंबर पर हैं। तिवारी का यह ट्वीट ऐसे समय में आया, जिससे साफ हो गया कि प्रदेश के कांग्रेस नेता सिद्धू को पार्टी की कमान सौंपने को लेकर एकमत नहीं हैं।
यह लिखा कैप्टन की चिट्ठी में
दूसरी ओर, कैप्टन द्वारा ओएसडी के जरिए सोनिया गांधी को भेजी चिट्ठी के मजमून के बारे में सूत्रों से पता चला है कि कैप्टन ने सिद्धू को प्रदेश प्रधान न बनाने की बात कहते हुए पार्टी अध्यक्षा को अप्रत्यक्ष तौर पर चेताया है कि एक व्यक्ति को आगे लाने के लिए पार्टी का बंटवारा होने से रोका जाए। इस पत्र में कैप्टन ने सोनिया गांधी को प्रदेश में हिंदू और दलित जनसंख्या का हवाला देते हुए एक नया फॉर्मूला भी सुझाया है।
हरीश रावत और सिद्धू भी खामोश
इस बीच, पता चला है कि सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद सिद्धू और हरीश रावत के बीच भी बैठक हुई। हालांकि इस बैठक के बाद न तो सिद्धू और न ही हरीश रावत मीडिया से मुखातिब हुए। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि सिद्धू के बारे में हाईकमान द्वारा लिए जाने वाले फैसले पर कैप्टन द्वारा सोनिया को भेजे पत्र ने दबाव बना लिया है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि सिद्धू को अगर प्रदेश प्रधान बना भी दिया गया तो उनके साथ मनीष तिवारी और चौधरी संतोख सिंह को कार्यकारी प्रधान की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, ताकि कैप्टन को भी नाराज न किया जाए।