उन्होंने कमेटी के सामने इस बात पर भी नाराजगी व्यक्त की है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, पार्टी मामलों के प्रभारी हरीश रावत ने नवजोत सिद्धू को लेकर कैप्टन की शिकायत का खुलासा तो नहीं किया लेकिन साफ कर दिया कि सिद्धू के बारे में फैसला सोनिया गांधी लेंगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सभी नेता पार्टी का हिस्सा हैं और इन नेताओं की पार्टी को जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पार्टी में सभी नेताओं को पूरा सम्मान दिया जाता है और यह परंपरा बरकरार रहेगी। उन्होंने सिद्धू को पार्टी के निकाले जाने संबंधी अटकलों से भी इनकार किया और कहा कि पूरा मामला पार्टी अध्यक्ष के ध्यान में है। तीन सदस्यीय कमेटी एक बार फिर सिद्धू को बुलाकर पूरे विवाद को समाप्त करने का निर्णायक प्रयास करने वाली है।
एक जुलाई तक समाधान संभव: रावत
पंजाब कांग्रेस में मचा घमासान आगामी एक जुलाई तक शांत हो जाएगा। यह दावा पंजाब मामलों के प्रभारी हरीश रावत ने किया है। उन्होंने कहा कि विधायकों के बेटों ने अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी की पेशकश को अस्वीकार कर दिया है। वहीं, आलाकमान की तीन सदस्यीय समाधान समिति नवजोत सिंह सिद्धू को एक बार फिर से दिल्ली बुलाकर बातचीत करेगी और पूरे विवाद को इसी हफ्ते समाप्त कर लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के प्रकरण को अलग कर दिया जाए तो कैप्टन द्वारा हाल ही में दो कांग्रेस विधायकों के बेटों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने की पेशकश ने पंजाब कांग्रेस में भुचाल ला दिया है। प्रदेश कांग्रेस प्रधान समेत अनेक मंत्री और विधायक कैप्टन के इस फैसले के खिलाफ खड़े हो गए।
कैप्टन ने भी कुछ मंत्रियों के जरिये अपने फैसले के समर्थन में बयान जारी करवाकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की। आखिरकार बीते सोमवार को सांसद प्रताप बाजवा विवाद सुलझाने आगे आए और उन्होंने अपने भाई फतेहजंग बाजवा और विधायक राकेश पांडे को पत्र भेजकर आग्रह किया कि वे मुख्यमंत्री द्वारा उनके बेटों को अनुकंपा के आधार पर दी गई नौकरी की पेशकश को अस्वीकार कर दें।
बाजवा के इस पत्र के बाद माना जा रहा था कि दोनों विधायक इसे स्वीकार कर लेंगे और प्रदेश कांग्रेस में यह विवाद समाप्त हो जाएगा। हरीश रावत के बुधवार के बयान से साबित हो गया कि दोनों विधायक मान गए हैं और गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके वे मुख्यमंत्री की पेशकश को लौटा देंगे।