कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : एएनआई
केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्षरत किसानों से पक्ष में खड़े पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आर्थिक विशेषज्ञ मोंटेक सिंह आहलुवालिया कमेटी की कृषि क्षेत्र को लेकर की गई सिफारिशों को खारिज कर दिया है। सोमवार को तीन ट्वीट कर मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘कृषि क्षेत्र पर मोंटेक कमेटी की प्रारंभिक सिफारिशों को अस्वीकार करके मैंने, मेरे और मेरी सरकार के रुख को स्पष्ट कर दिया है। ऐसा कुछ भी जो किसानों के हित में नहीं है या उनके बोझ में इजाफा करता है, पंजाब में तब तक लागू नहीं होगा जब तक मैं हूं।’
दूसरी ट्वीट में उन्होंने लिखा- ‘मोंटेक कमेटी एक विशेषज्ञ समूह है जिसका कार्य सिफारिशें करना है। लेकिन उन्हें स्वीकार या अस्वीकार करना मेरी सरकार का काम है। मुझे जमीनी हकीकत पता है और मुझे पता है कि मेरे किसानों के लिए क्या अच्छा है। मैं किसी भी कीमत पर उनके हितों से समझौता नहीं होने दूंगा।’
तीसरे ट्वीट में मुख्यमंत्री ने लिखा- ‘किसी भी मामले में, मोंटेक कमेटी के लिए अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करना अभी बाकी है और कृषि ही एकमात्र क्षेत्र नहीं है। यह कमेटी कोविड के बाद उपजे हालात में आर्थिक पुनरुत्थान के मद्देनजर खाका तैयार कर रही है। फिलहाल प्रारंभिक रिपोर्ट में से चुनिंदा सिफारिशों पर अमल करने का कोई प्रयोजन नहीं है।’
बता दें कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य को कोविड-19 के बाद वित्तीय संकट से उबारने के लिए आर्थिक विशेषज्ञ मोंटेक सिंह आहलुवालिया के नेतृत्व में समिति गठित की थी। इसने पिछले साल अगस्त में अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी। उस 74 पन्ने की अंतरिम रिपोर्ट में आहलुवालिया ने सरकार को ऐसे-ऐसे उपाय सुझाए थे, जिनमें से अधिकांश केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों से मेल खाते हैं और जिनका कैप्टन अमरिंदर सिंह लंबे अरसे से खुलकर विरोध करते रहे हैं।
आहलुवालिया समिति ने केंद्र सरकार के कृषि कानूनों और बिजली संशोधन बिल-2020 की खुली वकालत करते हुए इन्हें पंजाब में लागू करने का सुझाव दिया, जिसे पंजाब सरकार पहले ही किसान विरोधी करार देते हुए इन्हें किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देने का एलान कर चुकी है। इनके अलावा किसानों के लिए खुली मंडी, बड़े शहरों में प्राइवेट बिजली सप्लाई, किसानों को दी जा रही बिजली सब्सिडी को समाप्त करने, सरकारी मुलाजिमों को केंद्र सरकार के वेतनमान देने के अलावा कोविड संकट में उनके वेतन में कटौती के साथ-साथ राज्य में शराब पर और टैक्स बढ़ाने के सुझाव दिए गए थे।