कैप्टन ने मोदी को अवगत करवाया कि राज्य सरकार ने अपने स्तर पर उन सभी सीमांत किसानों को दो -दो लाख रुपये की कर्ज राहत मुहैया कराई है, जिन किसानों ने संस्थागत कर्ज उठाया था। इसी तरह छोटे किसानों का भी कर्ज माफ किया गया है।
उन्होंने बताया कि अब तक 5.52 लाख किसानों को 4468 करोड़ रुपये की कर्ज राहत दी जा चुकी है और बाकी योग्य किसानों को भविष्य में राहत प्रदान की जाएगी।
कैप्टन ने कहा कि किसानों को प्रधानमंत्री किसान और पेंशन स्कीमों द्वारा वित्तीय सहायता देने के लिए केंद्र सरकार के प्रयास भले ही प्रशंसनीय हैं लेकिन कर्ज में डूबे पंजाब के किसानों के संदर्भ में मौजूदा आर्थिक संकट से निकलने के लिए यह स्कीमें शायद सार्थक सिद्ध न हों। उन्होंने दुख जाहिर किया कि किसानों के लिए एकमुश्त राष्ट्रीय कर्ज माफी के लिए केंद्र को बार-बार की गई अपीलों के प्रति उसका उत्तर उत्साहजनक नहीं रहा।
कैप्टन ने ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ में संशोधन के दिए सुझाव
एक अन्य पत्र में मुख्यमंत्री ने मोदी से अपील की कि वह ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ में उचित संशोधन करने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय को निर्देश दें। कैप्टन ने अपने पत्र में कहा कि चाहे इस स्कीम को प्रगतिशील कदम के तौर पर माना गया है क्योंकि यह बीती स्कीमों की अपेक्षा बेहतर है लेकिन इसमें कुछ कमियां हैं जिसके परिणामस्वरूप न तो इसे पंजाब के किसानों द्वारा अपनाया गया और न ही इसे राज्य में लागू किया गया।
मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि इस बीमा योजना को क्षेत्र पर आधारित करने की बजाय खेत /प्लॉट पर आधारित करना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि क्षतिपूर्ति स्तर 90 प्रतिशत से अधिक (95 प्रतिशत तक) तक की इजाजत दी जाए और यह संबंधित किसान के पिछले साल की फसल पर अधारित होना चाहिए।
कैप्टन ने कहा कि कटाई के बाद मंडियों में आने वाली फसल को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को भी इस योजना का हिस्सा बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने मांग की कि किसानों से कोई प्रीमियम नहीं वसूला जाना चाहिए और इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को 60:40 के अनुपात में हिस्सेदारी डालनी चाहिए क्योंकि बहुत से किसान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी जिक्र किया कि ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ उन फसलों को कटाई के बाद होने वाले नुकसान के लिए योजना के अधीन लाती है जो खेत में काटकर रखी होती हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में फसलों की कटाई के लिए ठोस मशीनीकरन मौजूद है।
पंजाब के किसान अपनी फसलों को तुरंत मंडियों में ले जाते हैं परन्तु यदि मंडी में फसल को नुकसान होता है तो यह स्कीम के दायरे में नहीं आता। इसलिए ऐसे नुकसान को भी स्कीम के दायरे में लया जाना चाहिए।