पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य में हो रही पानी की समस्या को लेकर इजराइल की कंपनी मीकोरोट के प्रतिनिधियों के साथ खास मुलाकात की। यह जानकारी खुद मुख्यमंत्री ने अपने कू हैंडल के जरिए दी। इससे पहले मान ने मंगलवार को जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से भी मुलाकात कर प्रदेश में दूषित पेयजल के मुद्दे पर चर्चा की।
वैसे तो पंजाब एक विकसित राज्य माना जाता है, लेकिन ग्रामीण अंचलों में गरीबों का एक वर्ग कुपोषण की चपेट में है। कुपोषण की स्थिति जल प्रदूषण के प्रभाव के चलते और अधिक जटिल बन गई है। जनवरी 2020 में विश्व बैंक ने एक अध्ययन रिपोर्ट सार्वजनिक की थी, जिसमें कहा गया था कि पंजाब में कई परिवार मकान परिसर में ही निजी कुएं बना रहे हैं। ग्रामीण पंजाब में कई दशकों से बड़ी मात्रा में भूजल का दोहन होता रहा है। वहीं यहां मुफ्त बिजली की दीर्घकालिक नीति रही है। यही वजह है कि यहां घर-घर निजी उथले बोरवेल होते हैं। लेकिन, ये बोरवेल रासायनिक प्रदूषण युक्त पानी की चपेट में हैं।
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब के 23 जिलों में से 16 फ्लोराइड-युक्त, 19 नाइट्रेट-युक्त, 6 आर्सेनिक-युक्त और 9 आयरन-युक्त पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। दरअसल, हरित क्रांति ने भारत के अनाज उत्पादन को बढ़ाने में मदद की, लेकिन इसके अधिक हानिकारक प्रभावों का खामियाजा पंजाब, हरियाणा और कुछ अन्य क्षेत्रों को भुगतना पड़ा है। पंजाब देश में सबसे तेज गति से जमीन से पानी निकाल रहा है।