मुख्यमंत्री ने पत्र में बताया कि एक अप्रैल 2023 से 31 अगस्त 2023 तक राज्य सरकार ने 14464 करोड़ रुपये कर्ज के रूप में लिए गए, जिसमें से 7111 करोड़ रुपये ब्याज के तौर पर और 1773 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के रूप में इस्तेमाल हुए। कर्ज की इस रकम से पिछली सरकारों के बकाए भी चुकाए गए, जिनमें आरडीएफ के लिए बेलआउट 545 करोड़, बिजली सब्सिडी का बकाया 752 करोड़, सिंकिंग फंड में निवेश 1000 करोड़, गन्ना किसानों का बकाया 284 करोड़ यानी कुल 11464 करोड़ खर्च किए गए।
'पिछली सरकारों के कर्ज का ब्याज हमने चुकाया'
मुख्यमंत्री ने पत्र में राज्यपाल को जानकारी दी कि उनकी सरकार ने अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में जितना कर्ज लिया, उसमें से 27016 करोड़ रुपये पिछली सरकारों द्वारा लिए गए कर्ज का ब्याज चुकाने में ही दे दिए। पिछली सरकारें कर्ज तो लेती रहीं लेकिन उन्होंने किसी भी मद में कर्ज की एवज में कोई भुगतान नहीं किया और ब्याज सहित कर्ज का सारा बोझ आप सरकार पर आ गया है। पिछली सरकारों ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू तो कर दिया लेकिन उसके लिए धन की व्यवस्था नहीं की। इसी तरह कॉलेजों में यूजीसी स्कूल, बिजली सब्सिडी, आटा-दाल योजना, गन्ना किसानों के बकाए आदि भी पिछली सरकारें छोड़ गई हैं, जिन्हें अब आप सरकार ने चुकाया है। आप सरकार ने सिंकिंग फंड में डेढ़ साल में 4000 करोड़ रुपये का निवेश किया है जबकि पिछली सरकारों ने इसमें केवल 2988 करोड़ रुपये ही डाले थे।
आप सरकार ने आमदनी के स्त्रोत भी बढ़ाए: मान
मुख्यमंत्री ने माना कि उनकी सरकार ने कर्ज लिया है लेकिन आमदनी के अपने स्त्रोतों में भी बढ़ोतरी की है। उन्होंने बताया कि साल 2022-23 में जीएसटी 18128 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है जो साल 2021-22 में 15542 करोड़ रुपये था। इस तरह जीएसटी कलेक्शन में 16.6 फीसदी की वृद्धि हुई है। एक्साइज से 8437 करोड़ रुपये जुटाए गए, जो बीते साल इस मद में केवल 6157 करोड़ रुपये मिल सके थे। वाहनों पर टैक्स से 2674 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि इससे पहले यह आमदनी 2359 करोड़ रुपये थी। पेपर और रजिस्ट्रेशन से 4227 करोड़ रुपये जुटाए गए जो उससे पिछले साल से 3308 करोड़ ही थे।