कैप्टन अमरिंदर सिंह। (फाइल फोटो)
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कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार की अलोचना की। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अब केंद्र पर पलटवार किया। बुधवार को उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार राष्ट्रीय औसत से अधिक लोगों की जांच कर रही है। हालात और भी बेहतर होते अगर भारत सरकार 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को कोरोना का टीका लगवाने की तारीख में देरी न करती।
उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार 45 साल से ज्यादा आयु के लोगों को टीकाकरण के अधीन लाने में दो महीने की देरी करने के बजाय 50 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों के लिए टीकाकरण की हमारी मांग मान ली होती तो शायद मौजूदा हालात और बेहतर हो सकते थे।
बता दें कि केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार पर सवाल खड़े किए थे और कहा था कि राज्य सरकार ने कोरोना जांच और पीड़ितों के एकांतवास को लेकर उचित कदम नहीं उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने सार्वजनिक भीड़भाड़ पर कड़ी पाबंदी लगाई है और सभी शिक्षा संस्थान बंद कर दिए हैं। इसके अलावा कोविड से बुरी तरह प्रभावित 11 जिलों में रात नौ से सुबह पांच बजे तक कर्फ्यू लगाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से बार-बार केंद्र सरकार को लिखित रूप में और राज्य की मुख्य सचिव की तरफ से बैठकों में कहा गया कि टीकाकरण की मौजूदा योजना की समीक्षा करने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और अध्यापकों, जजों, बस डाइवरों और कंडक्टरों, पंचों/सरपंचों /मेयरों/म्युनिसिपल कमेटी, प्रधानों /पार्षदों, विधायकों और सांसदों के लिए पेशा आधारित टीकाकरण हर जगह शुरू किए जाने की अपनी मांग दोहराई। कैप्टन ने कोविड के बारे में नमूनों की रिपोर्टें मिलने में हो रही देरी का भी जिक्र किया।
भेजे गए 874 नमूनों में से अभी तक सिर्फ 588 की रिपोर्ट ही आई है, जिनमें से 411 नमूनों को बी-1.1.7 (यूके वायरस) और 2 को एन-440 के लिए पॉजिटिव पाया गया। मुख्यमंत्री ने केंद्र से अपील की है कि यूके स्ट्रेन की मौजूदगी से पेश चुनौती पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है और इस संबंध में राज्य के साथ अपेक्षित जानकारी और सलाह साझा की जाए।