सहकारी सोसायटियों की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाने के लिए पंजाब मंत्रिमंडल ने पंजाब सहकारी सोसायटी एक्ट, 1961 में संशोधन को मंजूरी दी है। यह एक्ट, 1961 में पंजाब एक्ट नंबर 25 द्वारा अस्तित्व में आया था और पिछले कई साल के दौरान इसमें कुछ कमियां सामने आईं, जिससे राज्य में क्षेत्रीय दफ्तरों के लिए कई व्यावहारिक मुश्किलें पैदा हो रही थीं।
इसके अलावा पंजाब सहकारी सोसायटी एक्ट, 1961 में संशोधन के लिए पंजाब सरकार और आरबीआई से भी सहकारिता विभाग को कई सुझाव /हिदायतें मिलीं। इन कमियों को दूर करने और राज्य सरकार और आरबीआई की हिदायतों का पालन करते हुए पंजाबी सहकारी सोसायटी एक्ट में विभिन्न संशोधन किए गए हैं।
इन संशोधनों की मुख्य विशेषताओं का जिक्र करते हुए सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब सहकारी सोसायटी एक्ट, 1961 में धारा 7 (1) शामिल की गई है, जिससे रजिस्ट्रेशन के लिए अर्जी के साथ रजिस्ट्रेशन फीस ली जा सके।
धारा 70-ए के अंतर्गत आरबीआई के आदेश को लागू करते हुए धारा 26सी अधीन इंश्योर्ड बैंक की मेंबरशिप पर पाबंदी लगाई गई है। इसी तरह धारा 6 में शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) के मामले में सदस्य के व्यक्तिगत हिस्से को सीमित कर दिया गया है।
यह पूंजीगत हिस्सा किसी भी मामले में अधिक से अधिक पांच प्रतिशत होगा। कर्जों की रिकवरी के लिए अधिकारियों को और समय देने के लिए धारा 22 (1) में भी संशोधन किया गया है।