उन्होंने कहा कि कोरोना का आम लोगों पर बहुत बुरा असर हुआ और व्यापार, कारोबार और उद्योग लगभग तबाह हो गए। लेकिन राज्य सरकार ने आम लोगों की मुश्किलों को समझते हुए उनकी रोजमर्रा की जरूरतों की पूर्ति, राशन, भोजन, स्वास्थ्य सहायता, प्रवासी मजदूरों की आवाजाही और 24 घंटे चलीं हेल्पलाइनों से लोगों को राहत प्रदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
राज्यपाल बदनौर ने अभिभाषण में कहा कि उनकी सरकार की उपलब्धियां वर्ष 2017 में पंजाब के लोगों के प्रति अपनी वचनबद्धता को पूरी तरह दर्शाती हैं। सरकार ने समानता के साथ विकास की नीति अपनाई है और भेदभाव रहित शांतिमय पंजाब को यकीनी बनाया है।
किसानों को मुफ्त बिजली, किसानों और भूमिहीन मजदूरों को कर्ज राहत (5.64 लाख किसान और 2.85 लाख भूमिहीन मजदूर), घरेलू खपतकारों को मुफ्त व सब्सिडी वाली बिजली (24.31 लाख डीएस खपतकार), सभी को सेहत कवर (करीब 40 लाख परिवार), सामाजिक सुरक्षा (25 लाख से अधिक लोगों को पेंशन), 38.39 लाख स्मार्ट छोटे राशन कार्ड वाले 1.47 करोड़ लोगों को सब्सिडी राशन, सरकार की उपलब्धियों में शामिल है।
किसान आंदोलन व तीन कानूनों का जिक्र आया तो राज्यपाल बोले- पढ़ा हुआ समझा जाए
सदन में राज्यपाल बदनौर जब अभिभाषण पढ़ रहे थे, तब राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए वे किसान आंदोलन और केंद्र सरकार द्वारा लागू तीन कृषि कानूनों के मुद्दे पर पहुंचे तो उन्होंने इतना ही कहा कि पैरा 24 से 142 तक अभिभाषण को पढ़ा हुआ समझा जाए। इस तरह राज्यपाल प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा केंद्रीय कृषि कानूनों का विरोध और किसान आंदोलन का समर्थन किए जाने के मामले में केंद्र सरकार के नुमाइंदे के रूप में राजधर्म निभाने में सफल रहे।
अभिभाषण के पैरा 24, 25, 26, 27, 28, 29, 30, 31 में किसान आंदोलन और केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों का उल्लेख किया गया है, जिसमें प्रदेश सरकार की ओर से केंद्र सरकार से अपील की गई है कि वह किसानों की चिंताओं को हल करे। अभिभाषण में तीनों कृषि कानूनों से होने वाले नुकसान का भी जिक्र किया गया है। हालांकि अभिभाषण के इसी भाग में केंद्र सरकार द्वारा किसानों और कृषि क्षेत्र में उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया गया है।