यह कानून किसी भी अधिकारी/सार्वजनिक पद पर काम करने वालों के खिलाफ शिकायत की समानांतर पड़ताल को रोकता है, यदि लोकपाल द्वारा इसकी जांच की जा रही है। इसी तरह लोकपाल के पास भी उस मामले की समानांतर जांच करने का अधिकार नहीं होगा, जिसकी जांच पहले ही सरकार द्वारा की जा रही है।
लोकायुक्त का एक चेयरपर्सन होगा जो हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का जज हो या रह चुका हो। सदस्यों की संख्या चार से अधिक नहीं होनी चाहिए जो सरकार की तरफ से नियुक्त किए जाएंगे। लोकायुक्त के सदस्यों में से कम से कम एक सदस्य अनुसूचित जाति या पिछड़ी श्रेणी या अल्पसंख्यक या महिला जरूर होनी चाहिए। लोकायुक्त के सदस्य प्रतिष्ठावान होने चाहिए जिन पर कोई भी दोष न हो।
चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर राज्यपाल करेंगे नियुक्ति
चेयरपर्सन और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा चयन समिति की सिफारिशों के बहुमत के आधार पर की जाएगी। चयन समिति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होगी जिसमें विधानसभा के स्पीकर, विपक्ष के नेता, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और पंजाब सरकार द्वारा मनोनीत किया गया एक प्रख्यात कानूनी विशेषज्ञ सदस्य होगा।