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कैबिनेट का फैसला : पंजाब की जेलों में अनुशासन का किया उल्लंघन तो भुगतनी पड़ेगी सात साल की सजा

Thu, 25 Feb 2021 02:20 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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पंजाब सरकार ने प्रिजन एक्ट-1894 में संशोधन करने का फैसला किया है। इससे राज्य की जेलों में कैदियों द्वारा किए जाने वाले दंगा-फसाद, जेल से भागने और जेल अनुशासन व नियमों का उल्लंघन करने जैसे अपराधों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया जा सकेगा और जेलों की सुरक्षा भी मजबूत की जा सकेगी। इस संबंध में एक बिल आगामी एक मार्च को शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में पेश किया जाएगा। यह फैसला बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।

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मंत्रिमंडल की बैठक में उपरोक्त एक्ट में नए दंडात्मक प्रावधान जोड़ने के संबंध में जेल विभाग के प्रस्वाव को मंजूरी दी गई है जिससे जेलों की सुरक्षा मजबूत की जा सकेगी और कैदियों द्वारा मोबाइल फोन का इस्तेमाल, जेलों में दंगा-फसाद, जेल अमले से मारपीट, जेल को नुकसान पहुंचाने और जेलों से भागने के अलावा नशीले पदार्थ रखने जैसे जुर्म पर लगाम लगेगी। 

सेक्शन 52-ए (1) में संशोधन करते हुए अब जेल अनुशासन का उल्लंघन करने वालों को न्यूनतम तीन साल और अधिकतम सात साल कैद या 50 हजार रुपये जुर्माने या दोनों सजाओं का प्रावधान किया गया है। जुर्माना अदा न करने पर कैद की मियाद और एक साल बढ़ा दी जाएगी। दूसरी या इससे ज्यादा बार दोषी पाए जाने पर दोनों में से किसी भी एक मियाद के लिए सजा दी जाएगी जोकि पांच वर्ष से कम नहीं होगी और जिसे बढ़ाकर 10 वर्ष किया जा सकता है। इसके साथ ही पांच लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकने वाला जुर्माना भी लगाया जाएगा। 

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संशोधित एक्ट में जोड़े गए हैं यह उपबंध

मौजूदा प्रस्ताव में अधिकतम एक वर्ष की सजा और 25 हजार रुपये के जुर्माने या दोनों का उपबंध है। सेक्शन 52-ए के सब-सेक्शन (3) को अब रद्द कर दिया गया है क्योंकि पहले यह निर्धारित किया गया था कि कैदी उसके द्वारा भुगती जा रही मौजूदा सजा पूरी होने के बाद सब-सेक्शन (1) और सब सेक्शन (2) के तहत सुनाई गई सजा भुगतेगा। 

एक नया सेक्शन 52-बी भी जोड़ा गया है जोकि दंगे-फसाद के लिए सजा से संबंधित है, जबकि सेक्शन 52-सी का संबंध जेल अधिकारी को अपना फर्ज पूरा करने से रोकने के लिए झगड़ा या जोर-जबरदस्ती करने संबंधी है। सेक्शन 52-डी का संबंध जेल से भागने से है जबकि सेक्शन 52-ई जेल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सेक्शन 52-एफ का संबंध जेल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी सजा से है। 

सेक्शन 52-जी का संबंध जेल के अंदर जेल अधिकारी को डराने-धमकाने की सजा से है जबकि सेक्शन 52-एच को संशोधित एक्ट में शराब, तंबाकू आदि लाने और अदला-बदली करने की सजा से संबंधित है। इसके अलावा सेक्शन 52-आई को संशोधित एक्ट में गैर-जमानती जुर्मों के लिए जोड़ा गया है। इसके तहत सेक्शन 52-ए, सेक्शन 52-बी, सेक्शन 52-सी, सेक्शन 52-डी, सेक्शन 52-एफ और सेक्शन 52-जी गैर-जमानती और प्रथम दर्जा मजिस्ट्रेट द्वारा मुकदमा चलाए जाने योग्य हैं। संशोधित एक्ट में सेक्शन 45 के क्लॉज (2) और (16) हटा दिए गए हैं।
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