मौजूदा प्रस्ताव में अधिकतम एक वर्ष की सजा और 25 हजार रुपये के जुर्माने या दोनों का उपबंध है। सेक्शन 52-ए के सब-सेक्शन (3) को अब रद्द कर दिया गया है क्योंकि पहले यह निर्धारित किया गया था कि कैदी उसके द्वारा भुगती जा रही मौजूदा सजा पूरी होने के बाद सब-सेक्शन (1) और सब सेक्शन (2) के तहत सुनाई गई सजा भुगतेगा।
एक नया सेक्शन 52-बी भी जोड़ा गया है जोकि दंगे-फसाद के लिए सजा से संबंधित है, जबकि सेक्शन 52-सी का संबंध जेल अधिकारी को अपना फर्ज पूरा करने से रोकने के लिए झगड़ा या जोर-जबरदस्ती करने संबंधी है। सेक्शन 52-डी का संबंध जेल से भागने से है जबकि सेक्शन 52-ई जेल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सेक्शन 52-एफ का संबंध जेल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी सजा से है।
सेक्शन 52-जी का संबंध जेल के अंदर जेल अधिकारी को डराने-धमकाने की सजा से है जबकि सेक्शन 52-एच को संशोधित एक्ट में शराब, तंबाकू आदि लाने और अदला-बदली करने की सजा से संबंधित है। इसके अलावा सेक्शन 52-आई को संशोधित एक्ट में गैर-जमानती जुर्मों के लिए जोड़ा गया है। इसके तहत सेक्शन 52-ए, सेक्शन 52-बी, सेक्शन 52-सी, सेक्शन 52-डी, सेक्शन 52-एफ और सेक्शन 52-जी गैर-जमानती और प्रथम दर्जा मजिस्ट्रेट द्वारा मुकदमा चलाए जाने योग्य हैं। संशोधित एक्ट में सेक्शन 45 के क्लॉज (2) और (16) हटा दिए गए हैं।