पंजाब मंत्रिमंडल ने फैसले के तहत राज्य में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के दूसरे चरण को शुरू करने की मंजूरी दे दी है। बुधवार को मंत्रिमंडल की मीटिंग के दौरान यह फैसला लिया गया कि स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण को 15वें वित्त आयोग से प्राप्त ग्रांट, मनरेगा और अन्य केंद्रीय व राज्य सरकार की स्कीमों को मिलाकर लागू किया जाएगा। इसके साथ ही जल जीवन मिशन के अंतर्गत समूचे ग्रामीण क्षेत्र में हर घर को जल कनेक्शन देने के लिए वित्त आयोग के अनुदान बरतने की मंजूरी भी दे दी गई।
मंत्रिमंडल ने मार्च, 2022 तक एसबीएम-जी और ग्रामीण क्षेत्र में 100 प्रतिशत घरों को जल कनेक्शन देने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आरडीएफ, आरआईडीएफ और राज्य सरकार की अन्य स्कीमों के अंतर्गत मंजूर प्रोजेक्टों को फंडों की कमी के कारण लागू करने में किसी किस्म की दिक्कत को दूर करने के लिए राज्य सरकार की तरफ से मैचिंग अनुदान का प्रबंध करने को भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
स्वच्छ भारत मिशन में केंद्र-राज्य का अनुपात 60:40 का
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन में केंद्र और राज्य सरकार 60:40 के अनुपात में हिस्सा देंगी। केंद्र सरकार के पंचायती राज्य मंत्रालय की तरफ से मार्च, 2020 को लिखे पत्र द्वारा अवगत करवाया गया है कि 15वें वित्त आयोग की तरफ से अपनी अंतरिम रिपोर्ट द्वारा साल 2020-21 के दौरान देश भर में पंचायती संस्थाओं को ग्रांट जारी करने के लिए 60,750 करोड़ जारी किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि इस अनुदान को दो हिस्सों में बांटा जाएगा, जिसके अंतर्गत 50 प्रतिशत हिस्सा क्षेत्र आधारित जरूरतों, वेतन, संस्थाओं के खर्च आदि के लिए होगा जबकि बाकी 50 प्रतिशत के साथ सैनिटेशन और अन्य प्राथमिक सहूलतें, खुले में शौच मुक्त व्यवस्था को बरकरार रखने, पीने वाले पानी की सप्लाई, बारिश के पानी की संभाल और पानी को रिचार्ज करने के लिए किया जाएगी।
ग्रामीण सैनिटेशन के लिए 260 करोड़
साल 2020 -21 के दौरान ग्रामीण विकास व पंचायत विभाग की तरफ से लगभग 260 करोड़ केवल ग्रामीण क्षेत्रों में सैनिटेशन के कामों के लिए जारी किये जाएंगे। यह सफाई गतिविधियां पंचायती राज्य मंत्रालय, भारत सरकार के 15 वें वित्त आयोग की ग्रांटों का प्रयोग करने संबंधी जारी दिशा निर्देशों की पालना करते हुए गांवों की पंचायतों में चलाईं जाएंगी।
स्मार्ट गांव मुहिम के दूसरे चरण के लिए 4030 करोड़
स्मार्ट गांव मुहिम के पड़ाव -2 के अंतर्गत योजना का कुल आकार 4030 करोड़ होगा, जबकि फेज-1 में कुल 835 करोड़ के कुल 19,132 काम शुरू किए गए हैं और अब यह मुकम्मल होने वाले हैं। मनरेगा के हिस्से के तौर पर साल 2019 -20 में 765 करोड़ के अब तक के सबसे अधिक खर्चे प्राप्त करने के बाद राज्य सरकार अब वित्तीय साल 2020 -21 के लिए पहले से मंजूर 800 करोड़ से बढ़ाकर 1200 रुपए करोड़ करने का लक्ष्य रख रही है।
ग्रामीणों के जीवन और रोजग़ार को सुरक्षित करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों संबंधी 2020-22 के लिए अपने विभिन्न प्रमुख कार्यक्रमों के तहत फंडों को इकठ्ठा करने का फैसला किया है। कैबिनेट ने ग्रामीण बुनियादी ढांचे और व्यक्तिगत लाभपात्रियों के विकास के लिए अलग-अलग योजनाओं जैसे मनरेगा, स्मार्ट गांव मुहिम (एसवीसी), पीएमवाईजी के साथ-साथ वित्त आयोग (एफसी) अनुदान, आरडीएफ और पंचायतों के अपने फंडों के उपलब्धता को यकीनी बनाने के लिए 5655 करोड़ की लागत से ग्रामीण कायाकल्प योजनाबंदी को मंजूरी दे दी।
ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग को अधिक से अधिक फंडों की उपलब्धता के लिए साल 2019 -20 में राज्य सरकार की तरफ से आरंभ की गई रणनीति, रोजग़ार को बढ़ावा देगी और गांव, ब्लाक और अन्य जिला पंचायतों के सक्रिय सम्मिलन द्वारा कोविड के बाद माहौल में गांवों के विकास को आगे बढ़ाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता के अनुसार, रणनीति के अंतर्गत 1088 करोड़ रुपये (14वें वित्त आयोग), 1388 करोड़ रुपये (15वें वित्त आयोग), 1200 करोड़ रुपये (मनरेगा), 1879 करोड़ रुपये (आरडीएफ) और 100 करोड़ रुपये (अन्य) शामिल हैं।
केंद्र से 2476 करोड़ रुपये की व्यवस्था की
केंद्रीय पंचायती राज्य मंत्रालय से 2476 करोड़ की राशि का प्रबंध किया गया है, जिसकी ताजा किस्त जून 2020 तक 14वें वित्त आयोग के प्रयोग सर्टिफिकेट (यूसी) जमा होने के बाद आने की उम्मीद है। राज्य को प्राप्त हुई 14वें वित्तीय आयोग की किस्त में 353 करोड़ (मार्च 2020 में सभी 13,324 ग्राम पंचायतों को पहले ही ऑनलाइन जारी की गई है) अन्य 353 करोड़ (खजाने में) और 382 करोड़ (खजाने में) शामिल है। कुल 1388 करोड़ पहले 15वें वित्त आयोग की किस्त में से 694 करोड़ अगले महीने में आने की उम्मीद है।