राज्य सरकार ने मजीठिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ ही पूरे मामले की आगे जांच के लिए एआईजी बलराज सिंह के नेतृत्व में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित कर दी है। इस टीम में शामिल अन्य अधिकारी हैं- डीएसपी राजेश कुमार और कुलवंत सिंह। यह टीम मजीठिया को गिरफ्तार करने संबंधी कार्रवाई भी करेगी।
49 पेज की एफआईआर में मजीठिया पर हैं ये आरोप
स्टेट क्राइम थाने में मजीठिया के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 25, 27 (ए) और 29 के तहत दर्ज की गई 49 पेज की एफआईआर में उन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपनी संपत्ति और वाहनों के जरिए ड्रग तस्करी में मदद की। इसके साथ ही उन्होंने नशे बांटने व बेचने के काम को फाइनेंस भी किया। मजीठिया पर ड्रग तस्करी की साजिश रचने का आरोप भी लगाया गया है।
एफआईआर में कहा गया है कि मजीठिया के अमृतसर स्थित आवास में विदेश से आने वाले एनआरआई ठहरा करते थे, जहां उन्हें वाहन और गनमैन भी उपलब्ध कराए जाते थे। इसके अलावा चंडीगढ़ में सेक्टर-39 स्थित सरकारी घर में भी नशा तस्करों को ठहराया जाता था। इन आरोपों के लिए एफआईआर में पकड़े गए नशा तस्करों के बयान को आधार बनाया गया है।
हाईकोर्ट में दाखिल की जा चुकी है एसटीएफ की जांच रिपोर्ट
एडीजीपी हरप्रीत सिद्धू के नेतृत्व में एसटीएफ की सीलबंद जांच रिपोर्ट 28-11-2017 को हाईकोर्ट में दाखिल की जा चुकी है, जिसे नवजोत सिद्धू बार-बार सार्वजनिक किए जाने की मांग करते रहे हैं। इसी मुद्दे पर पहले सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच और अब मुख्यमंत्री चन्नी के बीच विवाद होता रहा है। सिद्धू के दबाव में ही पंजाब सरकार ने एडवोकेट जनरल एपीएस देओल को हटाकर डीएस पटवालिया को एजी नियुक्त किया। पटवालिया रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग लेकर हाईकोर्ट गए और उन्होंने हाईकोर्ट को बताया कि एसटीएफ की रिपोर्ट खोलने पर कोर्ट ने कोई रोक नहीं लगाई है। तब हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि अब तक रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं की। एजी पटवालिया की 1 दिसंबर, 2021 की राय संबंधी रिपोर्ट के आधार पर अब राज्य सरकार ने मजीठिया के खिलाफ उपरोक्त कदम उठाया है।