स्कूल ऑफ ब्रिलियंस
100 सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को स्कूल ऑफ ब्रिलियंस के रूप में बदला जाएगा। इस नई शुरुआत के लिए 10 करोड़ रुपये प्रारंभिक बजट रखा गया है। इस योजना का उद्देश्य इन ग्रामीण स्कूलों को कक्षा 6 से 12 तक शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना है।
स्कूल ऑफ एप्लाइड लर्निंग
स्कूल ऑफ एप्लाइड लर्निंग के तहत छात्रों में तकनीकी कौशल सहित हुनर विकसित किया जाएगा। उन्हें आजीविका कमाने की दृष्टि से सक्षम बनाया जाएगा। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रारंभिक बजट में 10 करोड़ रुपये रखा गया है। इसके लिए शुरुआती चरण में प्रदेश भर में 40 स्कूलों में हाइटेक वोकेशनल लैब स्थापित की जाएगी।
स्कूल ऑफ हैप्पीनेस
सरकार 100 प्राइमरी स्कूलों को स्कूल ऑफ हैप्पीनेस में तबदील करेगी। इन प्राइमरी स्कूल में तीन से 11 साल की आयु के युवा छात्रों को बेहतर शिक्षा माहौल उपलब्ध कराने के नजरिए से अच्छी हवादार कक्षाएं , समर्पित खेल क्षेत्र, रिसोर्स रूम और एक्टिविटी कॉर्नर उपलब्ध कराने पर ध्यान केंदित किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के शुरुआत के लिए 10 करोड़ रुपये रखा गया है।
शिक्षा नीति पर कुछ अन्य मुख्य बिंदु
प्राइमरी और अपर प्राइमरी छात्रों की शिक्षा बुनियादी को मजबूत करने के लिए मिशन समरथ शुरू किया जाएगा। इसके लिए 10 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
इन शिक्षा योजनाओं को सहायता रहेगी जारी
समग्र शिक्षा अभियान के लिए 1,593 करोड़ रुपये, 16.35 लाख छात्रों को मिड-डे मील उपलब्ध कराने के लिए 467 करोड रुपये, मुफ्त किताबें, स्कूलों की मरम्मत और रखरखाव के लिए 140 करोड़ रुपये, सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करने और छातों पर सोलर पैनल लगाने के लिए 160 करोड़ रुपये, प्राइमरी स्कूलों के लिए 82, प्री प्राइमरी के लिए 35 और पंजाब युवा उद्यमी कार्यक्रम के लिए 15 करोड़ रुपये रखे हैं। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभिायान के लिए (रूसा) 80 करोड रुपये, सीएम छात्रवृत्ति के लिए छह करोड़ रुपये, सेनेटरी नैपिकन के लिए पांच करोड़ रुपये रखे गए हैं।
तकनीकी शिक्षा
पांच सरकारी पॉलिक्टिली कॉलेजों को सह शिक्षा संस्थानों में परिवर्तित किया गया। तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बजट में 525 करोड़ रुपये रखे गए हैं।