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Punjab: शिरोमणि अकाली दल में अकाली दल संयुक्त का विलय, छह साल बाद साथ आए बादल और ढींडसा

Tue, 05 Mar 2024 03:51 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

करीब छह साल पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींडसा, अकाली दल से अलग हो गए थे। उन्होंने सुखबीर बादल के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे और बाद में अकाल तख्त पर माफी मांगने की शर्त रखी थी। सुखबीर बादल के माफी मांगने के बाद एकता होने का रास्ता साफ हो गया था लेकिन किसान आंदोलन के चलते एकता तुरंत परवान नहीं चढ़ सकी थी।
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सुखबीर बादल और सुखदेव ढींडसा। - फोटो : twitter
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विस्तार
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शिरोमणि अकाली दल (शिअद) को उस समय मजबूती मिली, जब मंगलवार शाम सीनियर अकाली नेता सुखदेव सिंह ढींडसा ने अपने संयुक्त अकाली दल का शिअद में विलय कर दिया। इस मौके पर शिअद के अध्यक्ष सुखबीर बादल भी मौजूद थे, जिन्होंने न सिर्फ सुखदेव सिंह ढींडसा की पार्टी में वापसी का स्वागत किया बल्कि उन्हें शिअद पार्टी का संरक्षक भी बनाया। ढींडसा ने इस मौके पर कहा कि पंथ और पंजाब को मजबूत करने के लिए अकाली दल में एकता जरूरी है।

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शिअद के सीनियर और अनुभवी नेताओं में शामिल रहे सुखदेव सिंह ढींडसा ने सुखबीर बादल से मनमुटाव के चलते शिअद से अलग होकर अकाली दल (संयुक्त) का गठन किया था। मंगलवार को अपनी पार्टी का शिअद में विलय करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे नेताओं और कार्यकर्ताओं में पंथ में एकता लाने के लिए इस विलय के लिए जबरदस्त भावना थी। इसके अलावा पार्टी को लगा कि सुखबीर सिंह बादल ने 2015 में हुई बेअदबी के मामलों पर हार्दिक खेद व्यक्त किया है इसीलिए मैंने कल पार्टी के जिला प्रधानों की एक मीटिंग बुलाई और उन्होंने इस विलय को हरी झंडी दे दी।

इससे पहले सुखबीर बादल अपनी पार्टी की सीनियर नेताओं के साथ सुखदेव ढींडसा के आवास पर पहुंचे, जहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए सुखबीर बादल ने विलय को ‘दो परिवारों का विलय’ करार दिया। उन्होंने कहा कि ढींडसा ने बलविंदर सिंह भूंदड़ जैसे वरिष्ठ नेताओं व प्रकाश सिंह बादल के साथ मिलकर अकाली दल का निर्माण किया था।

माफी मांगी, सभी अकाली नेताओं से लौटने की अपील

सुखबीर बादल ने उन सभी अकाली नेताओं से जो किसी न किसी वजह से पार्टी छोड़ चुके हैं, को फिर से अपनी मातृ पार्टी में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि अकेले अकाली दल ही पंजाबियों की आकांक्षाओं की रक्षा करने में सक्षम है। उन्होंने कहा,‘मैं सभी से माफी मांगने के लिए तैयार हूं।’ उन्होंने दोहराया, ‘मैं बीबी जागीर कौर जी से भी हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि वे अपनी पार्टी में लौट आएं।’

सुखबीर बादल को अपना बेटा मानाः ढींडसा

पत्रकारों से बातचीत में सुखदेव ढींडसा ने कहा कि वह अपनी पार्टी के सदस्यों के साथ अकाली दल में फिर से शामिल हो गए, क्योंकि पंजाब के लिए यह बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमेशा सुखबीर बादल को अपने बेटे की तरह माना है और अकाली दल अध्यक्ष के रूप में उनका नाम प्रस्तावित किया था।

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ऐसे हुई थीं राहें जुदा, अन्य दलों को हुआ था फायदा 
2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींडसा के नेतृत्व में अकाली नेताओं ने शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) का गठन किया था। इससे पहले, जब वह पार्टी में थे, ढींडसा ने अन्य नेताओं के साथ, 2017 के विधानसभा चुनाव में हार के लिए सुखबीर बादल के इस्तीफे की मांग की थी लेकिन सुखबीर बादल ने मना कर दिया था। तब पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने ढींडसा को मनाने का प्रयास किया था लेकिन ढींडसा नहीं माने थे। 

संयुक्त अकाली दल में रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा, जगमीत बराड़, रणजीत सिंह तलवंडी और जस्टिस निर्मल सिंह जैसे कई दिग्गज शामिल हुए थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में वोट के बिखराव के कारण अकाली दल महज तीन सीट ही जीत पाया था और अन्य दलों को इसका फायदा मिला था। सियासी जानकारों का मानना है कि दोनों दलों के बीच एकता होने से पंजाब में सियासी समीकरण बदल सकते हैं। जानकार बताते हैं कि एकता के बाद अकाली दल और भाजपा के दरमियान फिर से गठबंधन हो सकता हैं और सुखदेव सिंह ढींडसा इस गठबंधन के सूत्रधार बन सकते हैं।
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