ऐसे हुई थीं राहें जुदा, अन्य दलों को हुआ था फायदा
2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींडसा के नेतृत्व में अकाली नेताओं ने शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) का गठन किया था। इससे पहले, जब वह पार्टी में थे, ढींडसा ने अन्य नेताओं के साथ, 2017 के विधानसभा चुनाव में हार के लिए सुखबीर बादल के इस्तीफे की मांग की थी लेकिन सुखबीर बादल ने मना कर दिया था। तब पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने ढींडसा को मनाने का प्रयास किया था लेकिन ढींडसा नहीं माने थे।
संयुक्त अकाली दल में रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा, जगमीत बराड़, रणजीत सिंह तलवंडी और जस्टिस निर्मल सिंह जैसे कई दिग्गज शामिल हुए थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में वोट के बिखराव के कारण अकाली दल महज तीन सीट ही जीत पाया था और अन्य दलों को इसका फायदा मिला था। सियासी जानकारों का मानना है कि दोनों दलों के बीच एकता होने से पंजाब में सियासी समीकरण बदल सकते हैं। जानकार बताते हैं कि एकता के बाद अकाली दल और भाजपा के दरमियान फिर से गठबंधन हो सकता हैं और सुखदेव सिंह ढींडसा इस गठबंधन के सूत्रधार बन सकते हैं।