हरियाणा विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी से निपटने के बाद शिअद और भाजपा ने पंजाब में अपने-अपने स्तर पर भविष्य के लिए खाका तैयार करना शुरू कर दिया है। हरियाणा में प्रचार के दौरान परस्पर विरोधी बयानबाजी से पनपी तल्खी, मतदान के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को फोन किए जाने से कुछ कम हुई प्रतीत हो रही है, लेकिन दोनों तरफ से अपने-अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
भविष्य की राजनीति पर ध्यान केंद्रित करते हुए शिअद ने विकास का खाका, आर्थिक खर्च में कटौती और नए स्त्रोतों के सृजन जैसे निर्णयों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। शहरी वोटरों को प्रभावित करने के नजरिए से यह पहले ही कई जिलों में हिंदू चेहरों को आगे कर चुका है। उधर, भाजपा ने भी हरियाणा चुनाव के जरिए अपने फायर ब्रांड नेता नवजोत सिद्धू को फिर से सक्रिय करके नए संकेत दिए हैं।
संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं कि सिद्धू को जल्द ही पार्टी की पंजाब इकाई से संबंधित कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। बहरहाल, अकाली-भाजपा गठबंधन के बीच तनातनी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है और दोनों ही अपने-अपने स्तर पर भविष्य की रणनीति तय करने में जुट गए हैं।
अपने स्तर पर भविष्य बनाने में जुटी शिअद
पंजाब विधानसभा में शिअद विधायकों की संख्या 58 है, जबकि भाजपा के 12 एमएलए हैं। 117 विधायकों वाले सदन में बहुमत के लिए 59 की संख्या की जरूरत होती है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र और हरियाणा के तजुर्बे से सबक लेते हुए शिअद ने पंजाब में अपने स्तर पर बहुमत जुटाने की कोशिश के तहत एक बार फिर से कांग्रेसी विधायकों पर ध्यान केंद्रित कर दिया है।
इसका संकेत शिअद अध्यक्ष व उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने कुछ समय पहले यह कहते हुए दिया था कि 4-5 और कांग्रेसी विधायक उनके संपर्क में हैं, जो कि सही समय आने पर उनके साथ आ जाएंगे।
ऐसे में यदि उक्त दोनों राज्यों की तरह ही भाजपा पंजाब में भी अपने गठबंधन सहयोगी से किनारा करती है तो विधायकों के दल-बदल से इंकार नहीं किया जा सकता।
नगर निकाय चुनाव पहला पड़ाव
बदले हालात में सियासी उतार-चढ़ाव का पहला नजारा आगामी नगर निकाय चुनाव में देखने को मिलेगा। यह चुनाव आगामी नवंबर माह में संभावित हैं।
हालांकि, पंचायत चुनावों में दोनों दल अलग-अलग तौर पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारते रहे हैं, लेकिन नगर निकायों में 1997 के बाद से ऐसा कभी नहीं हुआ है।
इस बार क्या होगा, इसी पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। दोनों दलों के नेता फिलहाल इस संबंध में कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं, हालांकि पंजाब भाजपा अध्यक्ष कमल शर्मा हरियाणा चुनाव से पहले स्पष्ट तौर पर यह कहते थे कि नगर निकाय चुनाव शिअद के साथ मिलकर ही लड़े जाएंगे।