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आईएएस खेमका एक बार फिर आए एक्शन में

Sat, 18 Oct 2014 11:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने एक बार फिर से सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। चार्जशीट की मार झेल रहे अशोक खेमका ने चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के साथ ही फिर से मुख्य सचिव को पत्र लिखकर उन पर उंगली उठाने वालों को करारा जवाब दिया है।
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डीएलएफ और वाड्रा लैंड डील मामले में म्यूटेशन खारिज करने के मामले में खेमका को चार्जशीट किया गया है। खेमका ने मुख्य सचिव से कहा है कि उन्हें बेवजह तंग किया जा रहा है। खेमका ने यह पत्र चार्जशीट के जबाव में लिखा है।

अब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग निशाने पर

पत्र में खेमका ने कहा है कि वे टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से पिछले 9 माह से  लैंड डील के मामले में दस्तावेज दिखाने के लिए कह रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई भी रिकॉर्ड दिखाया नहीं जा रहा। यह स्थिति है, जब इसी विभाग के एक अधिकारी की शिकायत पर उन्हें चार्जशीट जारी की गई है।

दस्तावेज देखने के लिए इस साल 16 जनवरी 2014 को कहा जा चुका है। इसके बाद मई और सितंबर में दो बार रिमाइंडर भेजा गया। पत्र में खेमका ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए सिर्फ परेशान करने के लिए दी गई चार्जशीट को तुरंत खारिज करने और संबंधित अधिकारियों पर जुर्माना लगाने की मांग की है।

इस पत्र में खेमका ने ऐसे अन्य मामलों की भी जांच करने की भी मांग की है, जिनमें लोगों ने अपने नाम पर सीएलयू और लाइसेंस लेकर गैरकानूनी तरीके से आगे जमीने बेची है। मालूम हो कि वाड्रा लैंड डील के मामले में खेमका ने 15 अक्तूबर को 2015 को म्यूटेशन खारिज किया था।

वाड्रा-डीएलएफ डील की म्यूटेशन रद्द की थी

हरियाणा के आईएएस अशोक खेमका का प्रदेश में कार्यकाल काफी विवादों से भरा रहा। इन 22 सालों में वे 45 तबादले झेल चुके हैं।

12 अक्तूबर 2012 को वह उस समय सबसे अधिक सुर्खियों में छाए जब चकबंदी महानिदेशक पद पर रहते हुए उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच जमीन को लेकर हुई डील की म्यूटेशन रद्द कर दी थी। 

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने इस प्रकरण के बाद खेमका का स्थानांतरण हरियाणा बीज विकास निगम के महानिदेशक पद पर कर दिया।

रैक्सिल दवा खरीद मामले में भी नाम आया

इसके बाद खेमका पर रैक्सिल दवा खरीद मामले में हुई गड़बड़ी को लेकर भी उंगली उठाई गई और यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। खेमका तबादले के बाद भी सुर्खियों में बने रहे।

उनके मीडिया में जाने पर राज्य सरकार ने सवाल खड़े किए। हालांकि खेमका ने भी मीडिया में अपनी बात रखने के लिए सरकार से अनुमति की मांग कर दी। सरकार ने वाड्रा डीएलएफ मामले में तीन अधिकारियों की कमेटी बनाई।

सीबीआई जांच की मांग हुई थी

कमेटी ने जांच में पाया कि खेमका द्वारा रद्द की गई म्यूटेशन उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती थी। इसके बाद सरकार ने खेमका को चार्जशीट किया। यह चार्जशीट रात के समय उनकी अनुपस्थित में घर पर थमा दी गई।

खेमका के खिलाफ सीबीआई जांच की भी सिफारिश की गई लेकिन बाद में सरकार पीछे हट गई। फिलहाल कैग की रिपोर्ट में खेमका के कार्यकाल में गेल्वैल्यूम शीट की खरीद में हुई अनियमितताओं पर उंगली उठाई गई है। इस पर सरकार ने फिर से जांच शुरू करवा दी है। 

कौन हैं खेमका और क्या किया उन्होंने

अशोक खेमका  अभी हरियाणा बीज विकास निगम के एमडी थे लेकिन अब उन्हें यहां से हटाकर हरियाणा अभिलेखागार विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है।

आपको बता दें की IAS अधिकारी अशोक खेमका ने तक़रीबन 6 महीने पहले रोबर्ट वाड्रा जमीन घोटाले का पर्दाफाश किया था जिसके बाद ही खेमका सुर्ख़ियों में आये।

आशंका थी कि उन पर एक बार फिर तबादले की गाज गिर सकती है और वहीं हुआ भी। उनका तबादला बीज निगम में किया गया, जहां जूनियर अफसरों को भेजा जाता है।

मुख्यमंत्री तक का आदेश नहीं माना था
अपनी ईमानदारी और भ्रष्टाचार विरोधी तेवर की वजह से ही अशोक खेमका हरियाणा में काफी लोकप्रिय हैं। साल 2004 में उन्होंने मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला तक का आदेश मानने से इंकार कर दिया था, जब सरकार ने कई शिक्षकों का सत्र के बीच में ही तबादला किया था।
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ऐसा रहा उनका 22 सालों का कार्यकाल

उनकी पहली पोस्टिंग सन 1993 में हुई थी। उनके पूरे कार्यकाल में उनकी अधिकतर पोस्टिंग कुछ महीने ही चलीं। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग विभागों में 8 पोस्ट ऐसी संभालीं, जोकि महीने भर या उससे भी कम समय के लिए थीं।

संयोग से, उनकी 44 में से 12 पोस्टिंग ऐसे विभागों में हुई जहां उन्हें जमीनी कामकाज में डील करना था। जहां भूमि के अधिग्रहण से लेकर उसके रेकॉर्ड, रेवेन्यू और विकास तक की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। मिनिस्ट्री ऑफ पर्सनल की एग्जेक्युटिव रेकॉर्ड शीट (ईआरएस) में दर्ज जानकारी के मुताबिक, खेमका ने केवल दो ही ऐसी पोस्टिंग संभाली हैं जो एक साल से ज्यादा समय तक रही हों।

2005-06 में यह उनका पहला कार्यकाल था जब उन्होंने शहरी विकास विभाग में बतौर मुख्य प्रबंधक डेढ़ साल के लिए काम किया। खेमका ने उद्योग विभाग में 2008 से 2010 के बीच, यानी एक साल 10 महीने तक प्रबंध निदेशक के तौर पर काम किया।

खेमका कह चुके हैं,' सरकार किसी भी पार्टी की रही हो, मुझे हर बार अपनी ईमानदारी की सजा भुगतनी पड़ी क्योंकि मैं लगातार घपलों और घोटालों का पर्दाफाश करता रहा हूं।'
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