पंजाब में धरना, प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को अब एक साल जेल की सजा काटनी पड़ेगी।
प्रदेश में लंबे अरसे से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और किसान संगठनों के विरोध का सामना कर रहे इस बिल को मंगलवार को पंजाब विधानसभा ने मंजूरी दे दी। हालांकि सदन में सरकार को विपक्ष के विरोध का सामना करना पड़ा।
इसके बिल के तहत, प्रदेश में किसी भी धरने, प्रदर्शन आदि के दौरान किसी व्यक्ति या समूह द्वारा निजी या सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान पहुंचाए जाने पर एक साल कैद और एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। उपमुख्यमंत्री ने एक्ट के लिए सुप्रीम कोर्ट केफैसले का हवाला दिया और विपक्ष के विरोध केबीच इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
लोगों की आवाज दबाने वाला कानून
सदन में विपक्ष केनेता सुनील जाखड़ ने कहा कि यह लोगों की आवाज दबाने वाला कानून है। इसके लागू होने पर किसी को भी सियासी रंजिश के तहत झूठे मामले में फंसाए जाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
कांग्रेस विधायक बलबीर सिंह सिद्धू और राणा गुरजीत सिंह ने भी इसका विरोध किया। बलबीर सिद्धू ने कहा कि बीते दिनों डेराबस्सी क्षेत्र में बिजली न आने का विरोध करने वाले 92 लोगों पर मामला दर्ज हुआ, जिनमें से 12 अभी तक जेल में हैं।
सबूतों के आधार पर ही होगी कार्रवाई
उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने कहा कि यह तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर संपत्ति के नुकसान को रोकने के लिए बनाया गया एक्ट है, ताकि विस्फोट, हिंसा आदि को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि पूरे सबूतों के आधार पर ही कोई कार्रवाई होगी, हवा में नहीं।