पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकार पूरी तरह से विपक्ष पर हावी रही। कांग्रेस ने सत्ताधारियों को घेरने की कोशिशें जरूर कीं। लेकिन सरकार हर मुद्दे पर न सिर्फ बच कर निकली, बल्कि विपक्ष को मुंह-तोड़ जवाब दिया।
सत्र की शुरूआत से पहले ही सतलुज यमुना लिंक नहर का मुद्दा सियासत में भूचाल ला चुका था। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर पंजाब के खिलाफ स्टैंड लिया था। अकाली-भाजपा की पंजाब में सरकार है और शिअद केंद्र सरकार में भी सांझीदार है। माना जा रहा था कि इस मुद्दे को लेकर विपक्ष सरकार पर तीखे हमले करेगा, लेकिन सरकार बड़ी सफाई के साथ पानी के मुद्दे पर खुद ही प्रस्ताव ले आई। कांग्रेस इस प्रस्ताव पर अपना संशोधन प्रस्ताव दिया। जिसमें कि एसवाईएल की जमीन किसानों को वापस करने का मुद्दा था।
कांग्रेस का संशोधन प्रस्ताव तो खारिज हो गया। लेकिन सरकार ने बड़ी चतुराई से कांग्रेस से यह अहम मुद्दा हाईजैक कर लिया। सीएम प्रकाश सिंह बादल ने उसी दिन सदन में ऐलान कर दिया कि एसवाईएल की जमीन किसानों को वापस कर दी जाएगी। अगले ही दिन सरकार ने इससे संबंधित बिल विधानसभा में पेश कर दिया। जिसका कांग्रेस को मजबूरी में समर्थन करना पड़ा। यह आइडिया कांग्रेस का था, जिसे सरकार ने बखूबी हथिया लिया। सीएम प्रकाश सिंह बादल एक मंझे हुए सियासतदान हैं।
वह अच्छी तरह जानते थे कि एसवाईएल आने वाले चुनाव में बड़ा मुद्दा बनने वाला है। लगातार घटनाक्रम की हरियाणा में भी तीखी प्रतिक्रिया हो रही थी। इसे देखते हुए उन्होंने एक कदम आगे चलते हुए एसवाईएल केलिए हरियाणा से ली गई सारी रकम उसे लौटाने का ऐलान कर दिया। पूरी रकम का चेक हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर को भेज दिया गया। इस तरह सरकार ने एसवाईएल केमुद्दे पर पूरी तरह क्रेडिट लेने की कोशिश की। राज्यपाल के अभिभाषण पर भी सरकार ने विपक्ष के हमलों को नाकाम किया। बजट पर बहस के दौरान तो डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने कांग्रेस विधायक दल केनेता चरनजीत सिंह चन्नी को निरुत्तर कर दिया। सत्र के आखिरी दिन फिर सरकार ने किसानों के हित में उनकेकर्ज का निपटारा करने को बिल पास करा लिया।