विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने खुद ही अपनी फजीहत कराई। सदन में ही कई विधायकों ने सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी की बात नहीं सुनी। कांग्रेस बिखरी और नेतृत्व-विहीन नजर आई।
कांग्रेस हाईकमान ने सुनील जाखड़ को हटाकर चन्नी को सीएलपी लीडर बनाया था। बतौर लीडर चन्नी का यह पहला सत्र था। ऐसे में उनका उतनी परिपक्वता से बर्ताव न कर पाना स्वाभाविक था। प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर ने भी यह माना कि पहले सत्र में कोई भी इंसान उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकता। लेकिन पार्टी केसीनियर नेताओं ने भी चन्नी को वह सपोर्ट नहीं दिया, जिसकी जरूरत थी। हालात यह थी कि चन्नी किसी मुद्दे पर वाक आउट या बायकॉट का फैसला करते तो कुछ विधायक उनके साथ चलते, तो कुछ अलग। एकजुटता के साथ पार्टी फैसला लेने में भी असमर्थ नजर आई। इतना ही नहीं, चन्नी किसी मुद्दे पर विरोध जता रहे थे तो अश्वनी सेखड़ी ने खड़े होकर किसी और मुद्दे पर बोलना शुरू कर दिया।
चन्नी ने उन्हें बैठने का इशारा किया तो सेखड़ी ने कोरा जवाब दे दिया, जिसे सारे सदन ने सुना। सदन केबाहर भी परमजीत सिंह पिंकी और चन्नी के बीच विवाद हुआ। आखिर बजट पर बहस के दौरान तो कांग्रेस की बहुत बुरी हालत हो गई। डिप्टी सीएम सुखबीर बादल के भाषण के बाद चन्नी ने बोलना था। उस समय सारे सीनियर कांग्रेसी नदारद थे। सिर्फ तीन युवा और महिला विधायक बैठी थीं। चन्नी के संबोधन के बाद सुखबीर ने बड़ी चालाकी से उन्हें अपने जाल में उलझा लिया। चन्नी ने अपने संबोधन के बाद बायकॉट का ऐलान कर सही फैसला लिया था। लेकिन वह सुखबीर की चुनौती में फंस कर फिर बैठ गए। उसकेबाद सुखबीर ने उन्हें अपने सवालों में ऐसा उलझाया कि चन्नी के जवाब का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।
इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह क्राइसिस मैनेजमेंट के लिए आगे आए। उन्होंने खुद सीएलपी की मीटिंग बुला कर सभी विधायकों को नसीहत दी। बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि चन्नी पहले विधायकों से सलाह किए बगैर एकाएक सदन में कोई मुद्दा उठा देते हैं। रणनीति भी तय नहीं होती। लेकिन कैप्टन की नसीहत केबाद आखिरी दो दिन कांग्रेस एकजुट दिखी और मुखर नजर आई।