विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब सरकार ने सूबे के उद्योगों को बड़ी राहत दी है। अब इंडस्ट्री को लगभग 17 फीसदी सस्ती बिजली मिलेगी। यह घोषणा बुधवार को पंजाब भवन में उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने की। उपमुख्यमंत्री ने दावा किया है कि पंजाब के उद्योगों को देश के अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा सस्ती बिजली मिल रही है।
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान सुखबीर ने कहा कि साल 2006-07 में जब उनकी सरकार आई तो उस समय बिजली उत्पादन मात्र सात हजार मेगावाट था, जो आज बढ़कर 13 हजार मेगावाट हो गया है। इसके अलावा ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रिब्यूशन (हस्तांतरण व वितरण) में पहले 24 फीसदी बिजली का नुकसान होता था, जो अब घटकर 14 फीसदी रह गया है। इससे पावर कारपोरेशन को भारी लाभ हुआ है।
एक समय कारपोरेशन के कर्मचारियों को वेतन देने के लिए फंड नहीं था, जबकि आज प्रदेश के पास सरप्लस बिजली उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि बिजली दरों में कटौती से सरकार को राजस्व में 150 से 200 करोड़ तक के नुकसान होने का अनुमान है।
उद्योगों के पलायन को बताया अफवाह
पंजाब से उद्योगों के पलायन की खबरों को अफवाह करार देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह विपक्षी पार्टियों की प्रदेश को बदनाम करने की सुनियोजित चाल है। देश के तमाम राज्यों से सबसे सस्ती बिजली पंजाब के उद्योगों को दी जा रही है। यही कारण है कि आज देश ही नहीं, विदेशोें से इंडस्ट्री पंजाब में आने को तत्पर है।
घरेलू बिजली कनेक्शन की दरों में कटौती न किए जाने पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि चंडीगढ़ को छोड़ अन्य राज्यों के मुकाबले घरेलू बिजली पंजाब में सस्ती है। आने वाले समय में घरेलू बिजली को भी राहत देने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि औद्योगिक बिजली की कीमतों में कमी से 98 हजार स्माल स्केल और 29 हजार मीडियम इंडस्ट्री को लाभ मिलेगा। इसके अलावा ‘पीक लोड इलेक्ट्रिसिटी चार्जेस’ के रूप में प्रति यूनिट दो रुपये का अतिरिक्त चार्ज भी सरकार ने हटाने का फैसला किया है।