विधानसभा चुनाव के लिए मतदान जारी है। सभी पार्टियों की निगाहें शहरी विधानसभा सीटों पर टिकी हैं। शहरी मतदाता इस बार किसे चुनेंगे, इसे लेकर सभी दलों में मंथन चल रहा है। पंजाब में शहरी और अर्ध शहरी इलाकों में कुल 51 सीटें हैं, जिनका जनादेश काफी मायने रखता है। शहरों में कांग्रेस और शिअद-भाजपा गठबंधन की जंग के बीच 2012 के विधानसभा चुनाव में पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब थी। वहीं, 2014 के लोक सभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने भी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई थी।
शहरी वोट बैंक को लेकर हमेशा से कांग्रेस और भाजपा के बीच ही लड़ाई होती आई है। हालांकि कुछ जगह अकाली दल भी इसमें कामयाब रहा था। 2007 के विधानसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह अकालियों के गढ़ मालवा में सेंध लगाने में लगे थे। वह अकालियों का परंपरागत वोट बैंक किसान वर्ग को कांग्रेस के पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे थे, जिसके चलते कैप्टन के भाषणों में पूरा फोकस ही इन पर रहता था। इससे कांग्रेस ने अपने परंपरागत वोट बैंक शहरियों को नाराज किया। नतीजा यह हुआ कि शहरियों ने भाजपा को सिर पर बिठाया और पार्टी 19 सीटें जीत गई। शहरियों की नाराजगी के चलते ही सत्ता कांग्रेस के हाथ से फिसली, हालांकि कैप्टन अपने मिशन मालवा में कामयाब रहे थे।
भाजपा शहरी वोटरों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी तो 2012 में उन्होंने भाजपा को हरा दिया। भाजपा की सीटें 19 से गिर कर 12 पर आ गईं। 2012 में भाजपा के परंपरागत वोट बैंक उच्च जाति हिंदुओं में गठबंधन को नौ फीसदी कम वोट मिले। गठबंधन के शहरी वोट प्रतिशत में भी दस फीसदी की गिरावट आई थी, लेकिन पीपीपी के मैदान में होने के कारण कांग्रेस को इसका फायदा नहीं मिल सका। वह फिर सरकार नहीं बना सकी। गठबंधन का शहरी और उच्च जाति हिंदुओं में जो वोट बैंक गिरा था, उसकी भरपाई उसने हिंदू ओबीसी, सिख ओबीसी, दलित सिख और हिंदू दलित वर्ग से कर ली। इन वर्गों में शिअद-भाजपा के वोट चार प्रतिशत बढ़ गए थे। इस बार कांग्रेस और शिअद-भाजपा के साथ आप भी मैदान में है। आप ने शहरी इलाकों में भी अच्छी पैठ बनाई है। युवाओं का आप से जुड़ना कांग्रेस और शिअद-भाजपा को परेशान कर रहा है।
2012 विधानसभा चुनाव
Punjab Polls 2017
- फोटो : File Photo
----- 2012 विधानसभा चुनाव -----
------------ सीटें-- मतदान प्रतिशत --- कांग्रेस ------ शिअद-भाजपा ---- पीपीपी
शहरी ------ 17 ---- 68.9 ----------- 6 (41.2 प्रतिशत)- 9 (39.8 प्रतिशत) - 0 (1.6 प्रतिशत)
अर्ध-शहरी -- 34 ----- 78.6 -------- 17 (40.8 प्रतिशत)- 17 (39 प्रतिशत) - 0 (6.2 प्रतिशत)
लोकसभा में कांग्रेस को शहरी सीटों पर मिली थी बढ़त
कांग्रेस को 2014 के लोकसभा चुनाव में भी शहरी सीटों पर बढ़त मिली थी। कांग्रेस अमृतसर, जालंधर और लुधियाना सीटों पर विजयी हुई थी। इन तीनों हलकों में शहरी इलाकों से कांग्रेस को ज्यादा वोट मिले थे। हालांकि शहरी इलाकों में आप भी उम्मीद से कहीं ज्यादा वोट ले गई थी। 2009 के लोक सभा चुनाव में भी शहरियों ने कांग्रेस को चुना था। गुरदासपुर के शहरी हलकों पठानकोट, गुरदासपुर, बटाला और दीनानगर में कांग्रेस आगे थी। अमृतसर के पांच में चार शहरी इलाकों में कांग्रेस की लीड थी। जालंधर के चारों शहरी हलकों के अलावा होशियारपुर, आनंदपुर साहिब, फतेहगढ़ साहिब के शहरी हलकों में कांग्रेस जीती थी। बठिंडा में हारने के बावजूद शहर से कांग्रेस आगे रही थी।