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Chandigarh News: पंजाब कला परिषद ने गुरु तेग बहादुर की 350 वीं शहीदी जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया

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चंडीगढ़। पंजाब कला परिषद की ओर से नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी के 350 वें शहीदी दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन सेक्टर-16 के पंजाब कला भवन में किया गया। प्रगट भये गुरु तेग बहादुर शीर्षक से संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर कलाकार दविंदर सिंह नागी की ओर से गुरु तेग बहादुर जी की वाणी की कैलीग्राफी प्रदर्शनी भी लगाई गई जिसमें गुरु जी की वाणी और शिक्षाएं दर्शाई गई हैं।
इस संगोष्ठी के मुख्य अतिथि केंद्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा के कुलाधिपति डॉ. जगबीर सिंह थे। अध्यक्षता गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर के कुलपति डॉ. करमजीत सिंह ने की। इस मौके पर उभरते विचारक अमरजीत सिंह ग्रेवाल ने संगोष्ठी में मुख्य भाषण दिया। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर की शहादत की नींव प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी द्वारा रचित बाणी और सिख सिद्धांत में मौजूद है। यह शहादत केवल औरंगजेब के अत्याचार के विरुद्ध नहीं थी, बल्कि उस सभ्यता व्यवस्था के विरुद्ध थी जो आक्रमणकारियों ने भारत में स्थापित की थी।
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डॉ. करमजीत सिंह ने गुरु तेग बहादुर जी की वाणी की व्याख्या करते हुए कहा कि इस शहादत का प्रभाव इतना महान था कि इसने खालसा का निर्माण किया और मुगल साम्राज्य को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय सिख इतिहास के प्रामाणिक स्रोतों को एकत्रित करके उनका डिजिटलीकरण करेगा ताकि सटीक स्रोत प्राप्त किए जा सकें।

इतिहासकार डॉ. राज कुमार हंस ने कहा कि गुरु साहिब की शहादत मानव अधिकारों की रक्षा का एक बड़ा प्रमाण है। पंजाब कला परिषद के चेयरमैन स्वर्णजीत सिंह स्वाई ने कहा कि हम इस कार्यक्रम के जरिए गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को याद कर रहे हैं

दूसरे सत्र में विभिन्न विद्वानों ने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, काव्य और शहादत पर चर्चा की। अध्यक्षता प्रख्यात विचारक डॉ. तेजवंत गिल ने की। वक्ताओं में डॉ. मनमोहन, डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. अमरजीत सिंह, डॉ. तजिंदर सिंह और डॉ. बलजीत सिंह शामिल थे। मंच का संचालन डॉ. जशनप्रीत ने किया।
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इस अवसर पर विदेश से आए प्रमुख सिख विचारक हरजिंदर सिंह दिलगीर और डॉ. साधु सिंह के अलावा वरिष्ठ पत्रकार सुरिंदर चहल, बलविंदर जम्मू और मदनजीत विशेष रूप से उपस्थित थे।
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