बिजली विभाग के निजीकरण के प्रयासों में लगे चंडीगढ़ प्रशासन को इस मामले में जोर का झटका लगा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बार फिर बिजली विभाग के निजीकरण के फैसले और इस संबंध में जारी टेंडर पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने इसके साथ ही शुक्रवार को चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने पिछले साल यूटी पावरमैन यूनियन की याचिका पर सुनवाई करते हुए एक दिसंबर को बिजली विभाग के निजीकरण के फैसले पर रोक लगा दी थी और साथ ही चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा इस संबंध में टेंडर जारी करने के फैसले को भी रोक दिया था। तब चंडीगढ़ प्रशासन हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गया तो सुप्रीम कोर्ट ने गत 12 जनवरी को हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने के साथ ही हाईकोर्ट को ही तीन महीने में मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया।
इसके बाद 24 मई को यूटी पावरमैन यूनियन ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर मांग की है कि जब तक हाईकोर्ट उसकी याचिका का निपटारा नहीं कर देता, तब तक चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा निजीकरण को लेकर किसी तरह की कोई कार्रवाई न की जाए। यूनियन ने अर्जी में कहा कि उसकी याचिका पर पिछली सुनवाई 29 अप्रैल को हुई थी और अगली सुनवाई 18 अगस्त के लिए तय हो गई थी, जिसका फायदा उठाते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने बिजली विभाग के निजीकरण की कोशिशें फिर से तेज कर दीं।
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में आदेश दिया था कि मामले का निपटारा तीन माह में किया जाए। अब तीन माह का समय बीत चुका है, लेकिन मामले का निपटारा नहीं हुआ है। इस वजह से जब तक मामले का निपटारा नहीं हो जाता, प्रशासन द्वारा निजीकरण के प्रयासों पर रोक लगाई जानी चाहिए। इस पर जस्टिस जितेंद्र चौहान और जस्टिस विवेक पूरी की खंडपीठ ने शुक्रवार को एक बार फिर बिजली विभाग के निजीकरण पर रोक लगा दी।