यह था पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाला
केंद्र सरकार की मदद से पंजाब में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप प्रदान की जाती है। 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के समय सामाजिक सुरक्षा मंत्री साधु सिंह धर्मसोत पर इस स्कॉलरशिप की राशि में धांधली के आरोप लगे थे। आरोप था कि 2019 में केंद्र सरकार से उक्त स्कॉलरशिप के लिए 303 करोड़ रुपये पंजाब को जारी किए। इनमें से 55.97 करोड़ रुपये के हिसाब-किताब की गड़बड़ी पाई गई।
इसकी जांच करने पर पता चला कि 39 करोड़ रुपये ऐसे इंस्टीट्यूट को दे दिए गए, जो सिर्फ कागजों में थे। इससे 9 लाख 5 हजार 340 विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित रह गए। यही नहीं, जिन कॉलेज-यूनिवर्सिटी से 8 करोड़ रुपये की वसूली की जानी थी, उन्हें 16.91 करोड़ की राशि और जारी कर दी गई। पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बनने के बाद इस मामले की जांच की गई तो गत फरवरी माह में सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग और वित्त विभाग से जुड़े कुल छह अफसरों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
बर्खास्त अधिकारियों में एक उपनिदेशक, एक डिप्टी कंट्रोलर, सेक्शन ऑफिसर, सुपरिंटेंडेंट और दो वरिष्ठ सहायक शामिल थे। इस धांधली में मुख्य आरोपी तत्कालीन कैबिनेट मंत्री साधु सिंह धर्मसोत इस समय वन विभाग में भ्रष्टाचार के मामले को लेकर जेल में बंद हैं। स्कॉलरशिप घोटाले के मामले में फिलहाल उन पर कार्रवाई नहीं हुई है।