सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) के आदेश के बावजूद सैनिक को विकलांगता पेंशन न देने और तय कानून के बावजूद अपील करने पर रक्षा मंत्रालय (एमओडी) को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी को अगली सुनवाई पर पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी को यह बताना होगा कि क्यों न मंत्रालय पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।
रक्षा मंत्रालय ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए सैनिक को विकलांगता पेंशन जारी करने के एएफटी के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि धर्मबीर सिंह बनाम भारत संघ और भारत संघ बनाम राजबीर सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी ऐसी याचिकाएं दायर की जा रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट इन मामलों में सेवा के दौरान विकलांगता, बीमारी, मृत्यु और स्थितियों बारे में स्पष्ट आदेश जारी कर चुका है। बावजूद इसके सैनिक को इंसाफ के लिए एएफटी की शरण लेनी पड़ी। वहां से सैनिक को इंसाफ मिला तो सरकार अपील में आ गई। ऐसे में हाईकोर्ट ने अब सुनवाई 16 जनवरी के लिए तय की है और रक्षा मंत्रालय को 10 लाख रुपये जुर्माने और अवमानना की कार्यवाही पर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने इससे पहले भी कई मौकों पर विकलांगता पेंशन के खिलाफ अपील के लिए रक्षा मंत्रालय को फटकार लगाई थी। मार्च 2022 में शीर्ष अदालत ने भी उस तरीके पर नाराजगी व्यक्त की थी जिस तरह से कानूनी मुद्दा सुलझने के बावजूद केंद्र विकलांगता पेंशन देने के खिलाफ अपील दायर कर रहा था।