पंजाब के एडवोकेट जनरल कार्यालय में हुई नियुक्तियों में धांधली का आरोप लगाते हुए इन्हें रद्द करने की अपील की गई है। हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर इसे एडमिट करते हुए अगले साल जुलाई में सुनवाई करने का आदेश दिया है। एडवोकेट कुलदीप कुमार सारथी और कनु शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि पंजाब सरकार ने अप्रैल में एडवोकेट जनरल ऑफिस में लॉ अधिकारियों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला था। इस विज्ञापन के अनुसार अगस्त में नियुक्तियां कर दी गईं।
याची ने बताया कि नियुक्ति में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया गया है, जबकि पंजाब सरकार ने पंजाब सिविल सर्विसेज (रिजर्वेशन ऑफ पोस्ट्स फॉर फीमेल) रूल्स, 2020 के तहत इसका प्रावधान किया है लेकिन इसे इन नियुक्तियों में लागू नहीं किया गया। इसके अलावा इन नियुक्तियों में पंजाब ऑफिशियल लैंग्वेज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2008 को भी लागू नहीं किया गया है। जिन्हें पंजाबी में काम नहीं करना आता है उनकी भी नियुक्तियां कर दी गईं हैं।
नियुक्ति में धांधली का आरोप लगाते हुए कहा गया कि कुछ समय में निकटवर्ती राज्यों में चुनाव हैं और चुनावी लाभ लेने के लिए बाहरी लोगों को एजी कार्यालय में नियुक्ति दी गई है। याची ने कहा कि चुनाव में लाभ लेने के लिए जनहित को प्रभावित होने नहीं दिया जा सकता है। साथ ही यह भी कहा कि नियुक्तियों में पंजाब लॉ ऑफिसर्स एक्ट का पालन भी नहीं किया गया। याचिका में इन नियुक्तियों को रद्द करने की मांग की गई है।