वर्तमान में हरियाणा व पंजाब के नौ जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को हाईकोर्ट के जज के तौर पर पदोन्नत किया जाना है लेकिन इन नियुक्तियों में लंबी प्रक्रिया के चलते समय लगने की संभावना है। जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया लंबी और समय लेने वाली है। हाईकोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद प्रस्तावित नामों को राज्य और राज्यपालों की मंजूरी मिलती है। इसके बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट के साथ प्रस्तावित नाम सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के समक्ष पहुंचते हैं और वहां से मजूरी मिलने के बाद इन्हें केंद्रीय कानून मंत्रालय को भेजा जाता है। कानून मंत्रालय से मंजूरी के बाद राष्ट्रपति के पास नियुक्ति वारंट पर हस्ताक्षर को भेजा जाता है। यह प्रक्रिया पूरी करने में अक्सर महीनों का समय लग जाता है।
लंबित मामलों का प्रतिशत
नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड के अनुसार 14.4 प्रतिशत यानी 63,515 मामले पिछले एक से तीन साल से विचाराधीन हैं। पिछले तीन से पांच वर्षों से विचाराधीन मामलों की संख्या 55,909 (12.68 प्रतिशत) है। पिछले 5 से 10 साल से विचाराधीन मामलों की संख्या 1,26,893 या 28.77 है। पिछले 10 से 20 साल के बीच 99,243 या 22.5 प्रतिशत मामले विचाराधीन हैं। वरिष्ठ नागरिकों की ओर से दायर 31,534 मामले विचाराधीन है जिनमें से 23,240 दीवानी और 8,294 आपराधिक हैं। वहीं महिलाओं की ओर से दायर 22,676 मामलों में 15,033 दीवानी और 7,643 आपराधिक मामले विचाराधीन हैं। हाईकोर्ट में संभवत सबसे पुराना मामला 1976 में रछपाल सिंह द्वारा गुरदासपुर क्षेत्र से संबंधित एक भूमि मामले में सोहन सिंह के खिलाफ दायर की गई नियमित दूसरी अपील है।