पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका के माध्यम से हरियाणा में बीफ को लेकर हो रहे विवाद का मुद्दा उठाया गया है। वीरवार को इस याचिका पर सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार और हरियाणा गो सेवा आयोग को जवाब दायर करने थे, लेकिन समय की कमी के कारण हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई नहीं हो सकी।
अब इस मामले पर सुनवाई 23 नवंबर को होगी। हाल ही में हरियाणा सरकार ने मेवात क्षेत्र में बिरयानी के सैंपल लेकर उनमें बीफ के इस्तेमाल की जांच के आदेश दिए थे। सरकार के इस आदेश को मौलिक अधिकारों का हनन करार देते हुए मेवात में नूंह निवासी हसीन ने जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया कि धर्म विशेष के लोग हरियाणा गो सेवा आयोग के इस निर्णय से आतंकित हैं।
हरियाणा गो सेवा आयोग की ओर से मेवात क्षेत्र में बिरयानी के सैंपल लेने के जो आदेश दिए गए हैं, वे धर्म विशेष को निशाना बनाने वाले हैं। इसके साथ ही आयोग ने केवल मेवात में इन सैंपलों को भरने के आदेश दिए हैं जो सीधे तौर पर इस क्षेत्र को टारगेट करना है। पूरे प्रदेश में कहीं और इस प्रकार की जांच नहीं हो रही है और केवल मेवात क्षेत्र को टारगेट किया गया है। याची ने कहा कि हरियाणा में इन आदेशों के चलते अल्पसंख्यक दहशत में हैं। इस प्रकार के आदेश सीधे तौर पर संविधान की धारा 14, 19, 21 और 25 का उल्लंघन है। इस पर हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार और गो सेवा आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया था।