हरियाणा के चर्चित आईएएस अधिकारी अशोक खेमका पर पंचकूला में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम में दर्ज एएफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही खेमका की गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
खेमका के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में पंचकूला के सेक्टर पांच थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। हरियाणा भंडारण निमग में प्रबंधक के पद पर हुई भर्ती में घोटाले की बात उजागर हुई थी। इस मामले में निगम के एमडी संजीव वर्मा ने पंचकूला पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत को आधार बनाते हुए पंचकूला पुलिस ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम में केस दर्ज किया था। इस मामले में खेमका का नाम सामने आया था, क्योंकि भर्तियों के समय अशोक खेमका एमडी थे। इस मामले में एफआईआर को रद्द करने की अपील करते हुए खेमका ने हाईकोर्ट की शरण ली है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के तौर पर वर्तमान में खेमका अपनी सेवाएं दे रहे हैं। याचिका में एफआईआर को रद्द करने की अपील करते हुए खेमका ने दलील दी कि वह प्रथम श्रेणी अधिकारी हैं और सेवा नियमों के तहत उन पर सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। खेमका ने कहा कि उनके खिलाफ यह एफआईआर रंजिश में करवाई गई है।
हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद इस मामले में अब हरियाणा सरकार व हरियाणा वेयरहाऊस कॉर्पोरेशन के एमडी संजीव वर्मा को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है। साथ ही खेमका को अंतरिम राहत देते हुए अगले आदेश तक उनकी गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी है।