याची के मोहाली निवासी करीबी रिश्तेदार उसकी बच्ची को गोद लेना चाहते थे। ऐसे में अडॉप्शन डीड तैयार कर सात जून, 2021 को चंडीगढ़ के सब रजिस्ट्रार डॉक्यूमेंट को सौंपी गई थी लेकिन 19 अक्तूबर को यह कहते हुए इससे इन्कार कर दिया गया कि इसमें बायलॉजिकल पिता की अनुमति शामिल नहीं है। याची ने बताया कि जो परिवार बच्ची गोद लेना चाहता है उनके परिवार में जेनेटिक बीमारी है जिसके कारण उनके दो बच्चे पहले ही मारे जा चुके हैं।
पीड़िता बच्ची को संभालने में सक्षम नहीं
हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद कहा कि इस मामले में बच्ची को जन्म देते हुए पीड़िता 13 साल की थी और अभी उसकी उम्र साढ़े 15 साल है। वह खुद भी नाबालिग है और ऐसे में बच्ची को संभालने में सक्षम नहीं है। वैसे भी दुष्कर्म से पैदा हुई अवैध संतान की मां प्राकृतिक अभिभावक है। ऐसे बच्ची से पिता का कोई जुड़ाव नहीं दिखाई दिया न ही उसने बच्ची को अपनाने में कोई रुचि दिखाई। वैसे भी ऐसे मामले में पहले मां प्राकृतिक अभिभावक है, पिता का दावा मां के बाद ही आता है।