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Chandigarh News: पंजाब बजट से पहले पीयू ने ग्रांट के लिए लिखा पत्र

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से बजट से एक दिन पहले ही पंजाब सरकार को ग्रांट के लिए पत्र लिखा गया है। पीयू प्रशासन ने वर्ष 2018 से लागू हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद समझौते के मुताबिक वर्ष 2022-23 के प्रस्तावित बजट में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी नहीं की है। वहीं 2021-22 में पंजाब सरकार की ओर से 6 प्रतिशत की बजाय 4.81 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ही ग्रांट दी गई है। इसलिए वर्ष 2021-22 के लिए 33 करोड़ 70 लाख की बजाय 34 करोड़ 8 लाख और वर्ष 2022-23 के लिए समझौते के अनुसार 33 करोड़ 70 लाख की बजाय 36 करोड़ 13 लाख रुपये की ग्रांट दी जाए।
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पंजाब सरकार की पीयू के लिए 2017 से 2022 तक ग्रांट
वर्ष ग्रांट लाख में -प्रतिशत बढ़ोत्तरी
2017-18 - 2700.00 - आधार वर्ष
2018-19 - 2862.00 - 6 प्रतिशत
2019-20 - 3033.72 - 6 प्रतिशत
2020-21 - 3215. 75 - 6 प्रतिशत
2021-22 - 3370.54 - 4.81 प्रतिशत
2022-23 - 3370.54 - निल


पीयू हॉस्टलों के लिए भी सरकार ने किया है 40 करोड़ का वायदा
पंजाब सरकार ने पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संगठन सीवाईएसएस को जीत दिलवाने के लिए बड़े-बड़े वायदे किए थे। इसमें पीयू के लिए दो हॉस्टल बनवाने का वायदा प्रमुख था। इसके लिए कई बैठकों के बाद पीयू में हॉस्टल बनवाने के लिए 40 करोड़ की ग्रांट पर सहमति बनी है। लेकिन पिछले एक-दो महीने में सिर्फ बैठकें ही हो रही हैं। पंजाब सरकार ने हॉस्टल बनवाने के लिए ग्रांट दिए जाने को लेकर कोई सकारात्मक भूमिका नहीं अदा की है।

कोट्स

पंजाब सरकार वायदों को करें पूरा
पंजाब सरकार के शिक्षा मंत्री से लेकर अन्य मंत्रियों ने पीयू में शिक्षा में सुधार और हॉस्टल निर्माण जैसे वायदे किए। अब वायदों को पूरा करने का समय है। पंजाब सरकार बजट में पीयू के लिए ग्रांट बढ़ाए और आधारभूत ढांचे में भी सुधार करे। आप सरकार का दावा है कि शिक्षा और स्वास्थ्य उसकी प्राथमिकता है, यह धरातल पर भी दिखना चाहिए। -अमताज सिद्धू, छात्र, पीयू
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छात्रों ने पंजाब सरकार पर जताया भरोसा, अब बनाए हॉस्टल
पंजाब सरकार ने पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्र संगठन को जीत दिलवाने के लिए पूरी लॉबी का जोर लगाया। अब काउंसिल के साथ सरकार में भी उन्हीं के सदस्य हैं। ऐसे में छात्रों के साथ किए गए वायदे के अनुसार पीयू को नए हॉस्टल बनवाकर दिए जाएं। पीयू में हॉस्टल की बहुत समस्या है। विद्यार्थी प्रतिदिन एप्लीकेशन लेकर डीएसडब्ल्यू दफ्तर के चक्कर काटते हैं। - अमरपाल तूर, छात्र, पीयू
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