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Chandigarh News: उच्च या निम्न रक्तचाप घातक, बना सकता है काला मोतियाबिंद का शिकार

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चंडीगढ़। अगर आप उच्च या निम्न रक्तचाप के मरीज हैं तो सावधान हो जाइए। यह बीमारी आपको काला मोतियाबिंद का शिकार बना सकती है। रक्तचाप में असंतुलन के कारण दिमाग में ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होने लगती है। इसका असर रक्त संचरण पर भी पड़ता है लेकिन यह अन्य अंगों को उतनी तेजी से प्रभावित नहीं करती जितनी तेजी से ऑप्टिकल नर्व को करती है इसलिए रक्तचाप से जुड़ी समस्या को नजरअंदाज न करें। यह आपको चुपके-चुपके अंधा बना सकती है। यह जानकारी पीजीआई एडवांस आई सेंटर के प्रमुख प्रो. सुरेंद्र पांडव ने वीरवार को दी।
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प्रो. सुरेन्द्र पांडव ने बताया कि इस मर्ज के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 12 से 18 मार्च तक विश्व ग्लूकोमा जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जानकारी देने का प्रयास किया जाएगा ताकि वे समय रहते अपनी आंखों की रोशनी जाने से बचा सकें। उन्होंने बताया कि सामान्य रक्तचाप वाले लोगों को भी इसका खतरा रहता है इसलिए 40 साल की उम्र के बाद सभी को आंखों की नियमित जांच करानी चाहिए ताकि काला मोतियाबिंद को समय रहते पता लगाया जा सके।

90 प्रतिशत मरीज हो रहे देरी का शिकार
प्रो. पांडव ने बताया कि चिंता की बात यह है कि बीमारी से ग्रस्त 90 प्रतिशत मरीजों को समय रहते इसका पता ही नहीं चलता। इसका मुख्य कारण लक्षण सामने न आना है। उन्होंने बताया कि इस मर्ज में लक्षण काफी देर हो जाने के बाद ही सामने आता है। ऐसी स्थिति में इलाज से भी कोई लाभ नहीं होता। लक्षणों में सिर दर्द, धुंधलापन और रोशनी के चारों तरफ अलग-अलग रंगों का दिखाई देना है। वहीं जब हमारे देखने का दायरा धीरे-धीरे कम होने लगता है तो यह समझ लेना चाहिए कि वह इस मर्ज की चपेट में आ चुके हैं। क्योंकि यह सीधे तौर पर हमारे देखने के दायरे को सिकोड़ता जाता है और एक समय पर ऐसी स्थिति आ जाती है जब वह दायरा बिल्कुल ही समाप्त हो जाता है और मरीज पूर्णता अंधा हो जाता है।
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इनसेट-

पीजीआई में 60 हजार मरीजों का पंजीकरण
जिस व्यक्ति को एक बार काला मोतियाबिंद हो गया और उसका समय पर इलाज न हुआ तो उसकी आंखों की रोशनी दोबारा नहीं वापस आ सकती इसलिए प्रयास होना चाहिए कि आंखों की नियमित रूप से जांच कराई जाए। प्रो. पांडव ने बताया कि पीजीआई में संचालित ग्लूकोमा क्लीनिक में अब तक 60 हजार मरीज पंजीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 75 प्रतिशत मरीज ट्राइसिटी के हैं। चिंता की बात यह है कि इलाज के लिए आने वाले मरीज बीमारी के आखिरी दौर में यहां पहुंच रहे हैं। इससे इलाज की आधुनिक तकनीक का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। अगर 2022 से अब तक के आंकड़ों को देखें तो क्लीनिक में 3965 मरीजों का पंजीकरण किया गया है।

लक्षण आए ये जरूरी नहीं
आंखों और सिर में तेज दर्द होना।
नज़र कमजोर होना या धुंधला दिखाई देना।
आंखें लाल होना।
रोशनी के चारों ओर रंगीन छल्ले दिखाई देना।
जी मचलाना।
उल्टी होना।
इसका रखें ध्यान
- 40 साल के बाद नियमित रूप से आंखों की जांच कराते रहें।
- रोजाना वर्कआउट करें ताकि इंट्रा ऑक्युलर प्रेशर को नियंत्रित किया जा सके।
- आंखों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि आंखों में लगी गंभीर चोट सेंकडरी या ट्रामैटिक ग्लूकोमा का कारण बन सकती है।
- अगर आपके परिवार में ग्लूकोमा या आंखों से संबंधित कोई समस्या है तो डॉक्टर को बताएं और उनके बताए अनुसार इलाज करें।

सप्ताहभर चलेगा जागरूकता कार्यक्रम
प्रो. पांडव ने बताया कि विश्व ग्लूकोमा जागरूकता सप्ताह के अवसर पर 12-18 मार्च तक विविध कार्यक्रम किए जाएंगे। जिसमें 11 मार्च को सेक्टर 17 में ओपन एयर म्यूजिकल इवेंट, 12 मार्च को रॉक गार्डन से सुखना लेकर तक जागरूकता रैली और 15 मार्च को पीजीआई के एडवांस आई सेंटर में जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को मर्ज से बचाव व उसके इलाज से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
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