पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) की नई कार्यकारिणी का गठन हुए लगभग 15 दिन हो गए, लेकिन वीसी प्रो. राज कुमार ने उनको चाय पर नहीं बुलाया। यह पहली बार हुआ है। हर वीसी पुटा पदाधिकारियों को घर पर आमंत्रित करते हैं। इस मुलाकात के बहाने शिक्षकों के मुद्दों को प्रमुखता से रखा जाता है ताकि वीसी की नजर में वे मुद्दे रहें और वह उस समस्या का समय-समय पर समाधान करें। इस बार निमंत्रण नहीं मिलने से पुटा पदाधिकारी नाखुश हैं, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि चाय उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं है, शिक्षकों के मुद्दे जरूरी हैं जो वे संघर्ष करके पूरे करवाएंगे।
पुटा का चुनाव 28 अक्तूबर को हुआ था। कार्यकारिणी का गठन हो गया और पहली बैठक भी आयोजित हो गई। पुटा के पदाधिकारियों ने शिक्षकों की मांगों को क्रमवार एक फाइल में सजा भी लिया था, ताकि वीसी चाय पर बुलाएंगे तो वे उनके सामने पेश करेंगे। इंतजार पांच से दस दिन किया गया, लेकिन कोई बुलावा नहीं आया। इंतजार करके पुटा ने खुद शिक्षकों के मुद्दों को बारी-बारी से उठाना शुरू कर दिया। सचिव अमरजीत सिंह नौरा का कहना है कि पहली बार किसी वीसी ने ऐसा किया है। हमारा उद्देश्य शिक्षकों के हितों की रक्षा करना है जो करते रहेंगे। अपनी घोषणाओं को हम पूरा करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
चाय पर न बुलाने के ये हो सकते हैं कारण
इस बार पुटा के चुनाव के दो ग्रुप खड़े थे। एक तरफ मृत्युंजय-नौरा ग्रुप तो दूसरी ओर मनु-कश्मीर ग्रुप। मनु-कश्मीर ग्रुप को घेरने के लिए मृत्युंजय ग्रुप ने आरोप लगाया था कि वह ग्रुप वीसी के पक्ष का है। वहीं से उसका संचालन होगा। सूत्रों का कहना है कि पुटा को चाय पर न बुलाने का एक कारण यह भी हो सकता है। इसके अलावा वीसी की व्यस्तता भी इसका कारण हो सकती है। हालांकि वरिष्ठ शिक्षक कहते हैं कि अपने कैंपस के शिक्षकों के लिए तो वीसी आधा घंटा निकाल सकते हैं। चाहे वह कार्यालय में ही बुलाते।