चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के मानव संसाधन विकास केंद्र (एचआरडीसी) को नए निदेशक मिल सकते हैं। इस पद पर कार्यरत निदेशक प्रो. एसके तोमर को डीयूआई बनाया गया है। डीयूआई पद का कार्य काफी विस्तृत होता है। ऐसे में दूसरे पदों की जिम्मेदारी संभालना आसान नहीं है। इसी तरह डीयूआई के पास संस्कृत, उर्दू, यूबीएस विभाग के अध्यक्ष पद का जिम्मा भी है। सूत्र कहते हैं कि अब विभागों के शिक्षक ही अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं।
डीयूआई बने डॉ. एसके तोमर के पास डीएसडब्ल्यू का कार्यभार था। साथ ही डीन रिसर्च भी थे। जैसे ही नई जिम्मेदारी मिली तो डीएसडब्ल्यू व डीन रिसर्च नए बनाए गए। इसी तरह अन्य प्रभार भी दूसरे शिक्षकों को दिए जा सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि एचआरडीसी के निदेशक पद के लिए कई शिक्षक कतार में हैं। इसके लिए आवेदन आदि मांगे जा सकते हैं। जिम्मा किसे दिया जाएगा, यह उच्चाधिकारी तय करेंगे। इस पद के लिए सिफारिशें भी आ रही हैं।
विभागों का संचालन बेहतर होगा
पीयू के यूबीएस विभाग को एक साल से कोई अध्यक्ष नहीं मिला है। अध्यक्ष का कार्यभार डीयूआई ही देखते आ रहे हैं। विभाग के चार शिक्षकों को अधिकार क्षेत्र बांट दिए गए हैं। अलग-अलग कार्य होने के कारण कुछ फाइलें लंबित भी रह जाती हैं। इससे विभागों का संचालन बेहतर नहीं हो पाता। वरिष्ठ शिक्षकों का मानना है कि वरिष्ठता क्रम में जो भी शिक्षक शामिल हो, उन्हें अध्यक्ष बनाया जा सकता है। हालांकि यह मामला हाईकोर्ट में भी चल रहा है। कुछ अन्य विभागों के अध्यक्ष पद का जिम्मा भी डीयूआई के पास है। वहां भी विभागों को अध्यक्ष की आवश्यकता महसूस हो रही है।
छोटे विभाग विलय हो जाएं तो खत्म हो सकता है अध्यक्ष पद का झंझट
नैक की रिपोर्ट के मुताबिक छोटे विभागों का विलय बड़े विभागों में होना चाहिए। इसको लेकर पीयू ने कई कमेटियां बनाई और प्रस्ताव भी बने, लेकिन लागू नहीं हो पाए। जैसे ही इसे लागू करने की बात सामने आई, तो किसी न किसी मामले को लेकर विरोध शुरू हुआ। जानकारों का कहना है कि यदि पीयू विभागों का विलय कर पाती है तो छोटे विभागों के अध्यक्ष बनाने का झंझट खत्म हो जाएगा। वहां समन्वयक कार्य करेंगे। साथ ही मुख्य विभाग के शिक्षक को अध्यक्ष बनाया जा सकेगा। हालांकि यह काम पीयू के लिए आसान नहीं है, लेकिन नैक को जवाब देने के लिए पीयू को कुछ करना भी होगा। पीयू का तर्क है कि कमेटी इस पर काम कर रही है और जल्द ही कुछ निर्णय सामने आएंगे।