हरियाणा-पंजाब के बॉर्डर से गुजरते हुए राजस्थान तक लंबी घग्गर नदी की धारा में सुधार व तटबंधों की मजबूती के लिए केंद्रीय जल आयोग के कहने पर केंद्रीय जल एवं बिजली अनुसंधान संस्थान पुणे द्वारा तैयार किए गए प्रोजेक्ट में अब बदलाव किया जाएगा। बदलाव का कारण पिछले सप्ताह घग्गर नदी में आया अप्रत्याशित पानी है। घग्गर नदी में क्षमता से करीब डेढ़ गुणा अधिक पानी आ जाने के कारण बाढ़ आ गई और सारे अनुमान ध्वस्त हो गए। ऐसे में केंद्रीय जल आयोग के भेजे इस प्रोजेक्ट में अब बदलाव किया जाना जरूरी होगा।
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सिंचाई विभाग में घग्गर नदी पर बतौर विशेषज्ञ काम कर रही टीम के अनुसार हरियाणा व पंजाब के बॉर्डर से होकर राजस्थान तक लंबी घग्गर नदी की धारा व इसके तटबंधों में सुधार के लिए केंद्रीय जल आयोग ने केंद्रीय जल एवं बिजली अनुसंधान केंद्र पुणे से एक गणितीय अध्ययन करवाया गया था। इसकी रिपोर्ट के आधार पर हरियाणा ने अलग व पंजाब ने अलग कार्य योजना बना केंद्रीय जल आयोग को भेजी थी।
बताया जा रहा है कि इस कार्य योजना में पिछले सालों तक आए घग्गर नदी के पानी की मात्रा को ध्यान में रखा गया। पुणे केंद्र की रिपोर्ट के बाद हरियाणा ने अंबाला, फतेहाबाद व अन्य जिलों में इसकी धारा के प्रवाह को कम नुकसानदायक बनाने व तटबंधों की मजबूती के लिए लगभग 100 करोड़ से अधिक की कार्ययोजना बनाकर केंद्रीय जल आयोग को भेजी थी। जिस पर विभाग ने पिछले सप्ताह ही पुनर्विचार कार्य योजना का जवाब दिया था।
प्रभावित क्षेत्रों की फिर मंगवाई जाएगी रिपोर्ट
सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हरियाणा की ओर से एक प्रोजेक्ट बनाकर पिछले सप्ताह ही केंद्रीय जल आयोग को भेजा है। इसी बीच घग्गर में उम्मीद से काफी ज्यादा मात्रा में पानी आ गया है। अब उक्त प्रोजेक्ट में भी बदलाव करना होगा। जहां-जहां घग्गर नदी का किनारा टूटा है और पानी ने ज्यादा प्रभावित किया है, उन जगहों की फिर से रिपोर्ट मंगवाई जाएगी। इस रिपोर्ट को केंद्रीय जल आयोग को भेजी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।