हरियाणा में बिजली संकट के बीच घोषित कटों से उद्योगों में उत्पादन 40 प्रतिशत तक कम हो गया है। ऐसे में उद्योगपतियों के पहले के करार टूटने की कगार पर हैं। जनरेटर से उद्योगों को चलाने से उत्पादन लागत बढ़ गई है। अनुमान है कि पिछले 10 दिनों में प्रदेश में उद्योगों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
बिजली को लेकर तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही पर्याप्त बिजली की व्यवस्था कर ली जाएगी। कुल मांग में से मात्र एक प्रतिशत तक ही कट लगाए जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द कटौती से छुटकारा मिलेगा।
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-रणजीत सिंह चौटाला, बिजली मंत्री।
प्रदेश में और बढ़ सकते हैं बिजली कट
अभी उद्योगों को कटों से राहत के आसार कम हैं। एक तो गर्मी बढ़ने से लगातार बिजली की मांग बढ़ रही है। दूसरा, आगामी दिनों में धान बिजाई का सीजन आएगा तो खेतों में और अधिक बिजली की जरूरत होगी।
अभी गेहूं के सीजन के चलते खेतों को कम बिजली आपूर्ति की जा रही है। बिजली निगम के आंकड़ों के मुताबिक अब 8600 मेगावाट रोजाना की मांग पहुंच चुकी है, आगामी कुछ दिनों में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है। ऐसे में कटों की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि अभी तक प्रदेश पर्याप्त बिजली की व्यवस्था नहीं कर पाया है।
शेड्यूल के अनुसार दी जाए बिजली: गोयल
चैंबर्स के पूर्व अध्यक्ष विष्णु गोयल ने कहा कि बिजली कटों से उद्योगों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने मांग की कि उद्योगों को लिए दिनों के हिसाब से बिजली आपूर्ति का शेड्यूल बनाया जाए, ताकि इंडस्ट्री लगातार चल सके। चाहे सप्ताह में पांच दिन बिजली दें और दो दिन बंद रखी जाए। वहीं, जनरेटर से इंडस्ट्री चलाने पर उत्पादन खर्च बढ़ रहा है।