मां बनने में देरी होने से एक ओर जहां गर्भधारण करने में समस्या हो सकती है, वहीं दूसरी तरफ ये स्तन कैंसर या ओवरी कैंसर का कारण भी बन सकता है। पंचकूला के बालाजी हेल्थ केयर की कैंसर सर्जन डॉ. ममता सिंगला का कहना है कि बांझपन की समस्या होने पर आईवीएफ तकनीक के प्रयोग के दौरान दिए जाने वाले हार्मोन से कैंसर का खतरा रहता है। ऐसे में जरूरी है कि समय रहते विवाह के बंधन में बंधकर मां बनने का सुख प्राप्त किया जाए।
प्रदूषण, तनाव और अनियमित दिनचर्या बन रही कारण
स्वास्थ्य निदेशक और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अमनदीप कंग का कहना है कि बांझपन की बढ़ती समस्या के लिए प्रदूषण और तनाव का बढ़ता स्तर भी काफी हद तक जिम्मेदार है। साथ ही भागदौड़ की जिंदगी में अव्यवस्थित दिनचर्या भी इसे बढ़ावा दे रही है। महिलाओं की तरह पुरुषों में भी विभिन्न प्रकार के संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है, जो गर्भधारण करने में रुकावट का कारण बन रहा है।
- 25 साल के अंदर शादी करने का निर्णय लें
- शादी के एक से डेढ़ साल के दौरान गर्भधारण हो जाना चाहिए
- उस दौरान किसी भी तरह की परेशानी होने पर इंतजार करने के बजाय तत्काल विशेषज्ञ की राय लें
- गर्भधारण में विलंब होने पर पति-पत्नी दोनों ही अपना चेकअप कराएं
- प्रतिदिन 25 से 30 मिनट योग, व्यायाम या आसन जरूर करें
- तनाव प्रबंधन के लिए मेडिटेशन बेहतर माध्यम हो सकता है
- शादी से पहले यौन संबंधों को लेकर सावधान रहें
- खानपान में पोषक तत्व युक्त आहार शामिल करें
तेजी से बढ़ रहे बांझपन के मामले
वर्ष कुल ओपीडी बांझपन के मामले
2017-18 37115 12386
2018-19 39761 13550
2019-20 37908 13118
(नोट : पीजीआई के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के आंकड़े)
बांझपन के इलाज के लिए मौजूदा समय में कई आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। आईवीएफ उनमें से एक है। फिर भी युवाओं को इस समस्या के समाधान के लिए इलाज के बजाय समय पर विवाह का निर्णय अपनाना होगा जिससे उनके साथ ही उनकी संतान स्वस्थ जीवन जी सके। -डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक