हाईकोर्ट ने जाट आरक्षण पर लगाई रोक
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जाट आरक्षण पर रोक लगने से शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के तहत एडमिशन का सपना संजोए बैठे छात्रों को तगड़ा झटका लगा है। आरक्षण के तहत एडमिशन को पहले ही असमंजस की स्थिति बनी हुई थी और अब हाईकोर्ट के स्टे के बाद कसर पूरी हो गई है। प्रदेश सरकार ने भले ही आरक्षण को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर दिया हो, लेकिन अभी तक किसी भी शैक्षणिक संस्थान में इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
एडमिशन के समय आरक्षण देना है या फिर नहीं, इसे लेकर अभी खुद संस्थान असमंजस में थे। एमडीयू की तरफ से बुधवार को जारी किए गए शेड्यूल में भी आरक्षण को लेकर अलग से कोई कॉलम नहीं दिया गया है। हर साल उच्चतर शिक्षा निदेशालय में होने वाली सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों की बैठक भी इस बार नहीं हो सकी। खास बात यह है कि इस बैठक में प्राचार्यों को दिशा-निर्देश दिए जाते हैं कि किस श्रेणी में आरक्षण देना है या नहीं।
इस असमंजस की स्थिति के बाद अब हाईकोर्ट ने रही-सही कसर पूरी कर दी। हाईकोर्ट ने 21 जुलाई तक इस पर स्टे कर दिया है। ऐसे में उन छात्रों को बड़ा झटका लगा है, जो एडमिशन के समय आरक्षण का लाभ लेने का सपना संजोए बैठे थे।
21 जुलाई तक हो जाएंगे एडमिशन
हाईकोर्ट की तरफ से स्टे लगने के बाद इस पर अलग-अलग तर्क दिए जा रहे हैं। इनसो के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप देशवाल का कहना है कि यह एक साजिश के तहत हुआ है। 21 जुलाई तक यूजी-पीजी की एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। ऐसे में यदि हाईकोर्ट स्टे हटाता भी है तो इस सत्र में छात्रों को इसका फायदा नहीं होगा।
फिलहाल छात्रों को पुरानी व्यवस्था के तहत ही ऑनलाइन आवेदन करने होंगे। इसके बाद जो भी दिशा-निर्देश होंगे, उसी के आधार पर एडमिशन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
- प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया, कुलपति एमडीयू