ऐसे में इन पर फिलहाल सरकार का डंडा नहीं चल पाएगा। पूर्व से चले आ रहे प्ले स्कूलों में भी अनेक ऐसे हैं, जिनमें नौनिहालों की सुरक्षा दांव पर है। न तो पूरी तरह सुरक्षा बंदोबस्त हैं, नही ढांचागत सुविधाएं हैं। बावजूद इसके निजी प्ले स्कूल संचालक मोटी कमाई कर रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में पूर्व संचालित स्कूलों के लिए भी गाइडलाइन जारी की जा सकती हैं।
मनमाने तरीके से नहीं चलेंगे प्ले स्कूल : शर्मा
महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक हेमा शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की गाइलाइन लागू कर दी गई हैं। जिलों में अब कोई भी नया निजी प्ले स्कूल बिना मान्यता के नहीं चलेगा। केंद्र व प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है।
स्वास्थ्य सहयोग संगठन ने उठाया था मुद्दा
स्वास्थ्य सहयोग संगठन हरियाणा के अध्यक्ष बृजपाल परमार व महासचिव भारत भूषण बंसल ने आरटीआई के माध्यम से इसी वर्ष महिला एवं बाल विकास विभाग से प्ले स्कूलों के पंजीकरण को लेकर जानकारी मांगी थी। जिसमें विभाग ने बताया था कि किसी भी स्कूल का पंजीकरण नहीं है। इसके बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री कविता जैन ने 2013 में केंद्र सरकार की ओर से बनाई गई गाइडलाइन लागू करने के निर्देश दिए थे। जिन पर अब अमल शुरू हो गया है।