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निजी क्लीनिक संचालकों के सामने आई नई उलझन

Wed, 06 Nov 2013 07:40 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रापर्टी टैक्स की जितनी कैटेगरी, उतनी ही उलझन...। रिहायशी इलाके के प्लॉट के रेट अलग हैं तो सोसाइटी की फ्लैट्स के रेट अलग। अब क्लीनिक चलाने वाले उलझन में फंस गए हैं।
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क्लीनिक संचालकों में इस पर संशय है कि आखिर वे किस वर्ग में आते हैं और किस दर से प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान करें। प्रदेश सरकार की अधिसूचना के मुताबिक, निजी अस्पतालों का वर्गीकरण और टैक्स का आकलन उपलब्ध बेड की संख्या के मुताबिक किया गया है।

मंगलवार को नगर निगम दफ्तर पर टैक्स जमा कराने पहुंचे कुछ क्लीनिक मालिकों ने मामला स्पष्ट नहीं होने की बात कहते हुए टैक्स का भुगतान ही नहीं किया। वहीं, निगम अधिकारी का कहना है कि अगर रेजीडेंशियल एरिया के साथ क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है तो मिसयूज का चार्ज किया जाएगा।
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प्रॉपर्टी टैक्स के भुगतान में 30 फीसदी की छूट का फायदा लेने की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, करदाताओं की संख्या भी बढ़ती जा रही है।

क्लनिक चलाने वाले डॉ. अंकुर ने कहा कि उन्हें इस बात का पता नहीं चल रहा है कि आखिरकार किस रेट से टैक्स का भुगतान करें। इस अधिसूचना में कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम के संबंधित कर्मी भी इस बात को साफ तौर पर नहीं बता पा रहे हैं।


डा. डीके ओबरॉय ने भी कहा कि किस रेट से टैक्स का भुगतान करें, यह सबसे बड़ी समस्या है। इस बारे में समय से जानकारी दी जानी चाहिए थी।

क्लीनिक कर्मी मदन प्रसाद ने कहा कि टैक्स जमा कराने के लिए उन्हें भेजा गया, लेकिन यह समझ में नहीं आया कि आखिरकार कितने रुपये जमा कराने हैं।

डा. आरपी मेहता ने भी क्लीनिकों के लिए प्रॉपर्टी टैक्स की स्पष्टता नीति नहीं होने पर नाराजगी जताई।

सेक्टर-15 निवासी दलीप कनवर ने कहा कि किसी भी प्रॉपर्टी के टैक्स आकलन की जिम्मेवारी लोगों पर नहीं थोपी जानी चाहिए। अगर यह राशि निर्धारित से कम हुई तो उन्हें नोटिस भेजा जाएगा, लेकिन अधिक हुई तो रकम की वापसी के लिए उन्हें फिर परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
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