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चंडीगढ़: राष्ट्रपति बोले- शिक्षा में रटने की प्रथा छोड़ अनुसंधान को अपनाना होगा, जमकर की पेक की सराहना

Wed, 17 Nov 2021 01:27 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) के शताब्दी समारोह में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने संस्थान की जमकर तारीफ की और शिक्षा में अनुसंधान को अपनाने की बात सभी से कही। उन्होंने कहा कि जब भी देश को जरूरत पड़ी है तो पेक ने उसे पूरा किया है।
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पेक के शताब्दी समारोह में पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज हम एक ऐसे युग में हैं, जब रटने वाली शिक्षा को अलग रखना होगा और शिक्षा में अनुसंधान के विचार को बढ़ावा देना होगा। हमारी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति हम सभी के लिए एक मार्गदर्शक है, क्योंकि यह अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करती है। इस नीति के तहत शिक्षा, सोचने और समस्याओं को हल करने की शक्ति बढ़ाएगी। यह बात राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पेक में विद्यार्थियों, शिक्षकों व अन्य को संबोधित करते हुए कही। 

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राष्ट्रपति ने कहा कि रचनात्मक और बहु-विषयक कैसे हो और अध्ययन के हमेशा बदलते क्षेत्रों में नई सामग्री को कैसे अनुकूलित किया जाए और अवशोषित करने के बारे में अधिक सीखने की ओर यह नीति अग्रसर होगी। पाठ्यक्रम में बुनियादी कला, मानविकी, खेल और भाषाएं शामिल होंगी और यह हमारी संस्कृति और मूल्यों पर आधारित होंगी। 
 
अपने संबोधन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि उनके लिए यह गर्व का क्षण है कि वह पेक के शताब्दी समारोह में आए हैं। हम सभी के लिए यह जानना भी एक सम्मान की बात है कि पेक हमेशा राष्ट्र की जरूरतों के लिए आगे बढ़ा है। 1960 के दशक की शुरुआत में जब यह महसूस किया गया कि हमारे देश को वैमानिकी इंजीनियरों की सेवाओं की आवश्यकता है, भारतीय वायुसेना ने पेक से संपर्क किया था। 
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कुछ ही समय में इंजीनियरिंग के अन्य विषयों से छात्रों को वैमानिकी इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता के अंतिम वर्ष में स्थानांतरित करके तत्काल आवश्यकता को पूरा किया गया था। इस विषय की संकाय भारतीय विज्ञान संस्थान से थे। संयोग से उस समय वहां के निदेशक कोई और नहीं बल्कि प्रोफेसर सतीश धवन थे, जो स्वयं इस कॉलेज के एक प्रतिष्ठित पूर्व छात्र थे। आईआईएससी के साथ इस संयुक्त प्रयास के माध्यम से पेक ने 1964 में भारत को 17 स्नातक वैमानिकी इंजीनियरों का पहला बैच देने वाले पहले इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में इतिहास रचा।

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वैज्ञानिक सतीश धवन की उपलब्धियां कभी नहीं भुलाई जा सकती

राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे यह जानकर खुशी हुई कि इस संस्थान के पूर्व छात्रों ने हमारे देश को अपार प्रसिद्धि दिलाई है। उन्होंने एक असाधारण वैज्ञानिक प्रोफेसर सतीश धवन का नाम लिया। कहा कि उन्होंने तेजी से विकास और शानदार उपलब्धियों के माध्यम से भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का नेतृत्व किया। उन्हें भारतीय वैज्ञानिक समुदाय द्वारा प्रायोगिक द्रव गतिकीय अनुसंधान का जनक माना जाता है। मेरे आदरणीय डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें न केवल एक गुरु के रूप में बल्कि उनके जीवन के उन तीन शिक्षकों में से एक माना, जिन्हें वे सर्वोच्च सम्मान में रखते थे। ऐसे लोग न केवल अच्छे पेशेवर होते हैं बल्कि महान संस्था निर्माता भी होते हैं।

कल्पना चावला लाखों लोगों की प्रेरणा बनीं हुईं
राष्ट्रपति ने कहा, अंतरिक्ष में यात्रा करने वाली भारतीय मूल की पहली महिला डॉ. कल्पना चावला दुनिया भर में लाखों लोगों की आदर्श हैं। मुझे यह जानकर खुशी हुई कि पेक ने भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी की कल्पना चावला पीठ की स्थापना की है। आईआईटी, पीजीआई और इसरो जैसे अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ निरंतर सहयोग के लिए भी पेक जाना जाता है। इस तरह के कदम अनुप्रयोग-उन्मुख अनुसंधान में उत्कृष्टता के लक्ष्य को साकार करने में सहायक होते हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति भवन में एक बंदोबस्ती निधि शुरू की गई थी। दो साल पहले उन्हें आईआईटी दिल्ली के एंडोमेंट फंड को लांच करने का अवसर मिला। इस पहल के माध्यम से पूर्व छात्र अपने संस्थान की बेहतरी के लिए दान कर सकते हैं और साथ ही जरूरतमंद छात्रों की मदद कर सकते हैं।

पेक पूरी दुनिया में फैला रहा रोशनी
समारोह की शुरुआत में चंडीगढ़ के प्रशासक एवं पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा, पेक के पूर्व छात्र पूरी दुनिया में रोशनी फैला रहे हैं। उन्होंने पेक के इतिहास पर भी प्रकाश डाला। कहा कि पेक अपने स्टाफ, फैकल्टी, विद्यार्थियों के कारण आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय का भी स्वागत किया गया। पेक निदेशक प्रो. बलदेव सेतिया ने सभी का स्वागत किया। पेक के सफर पर प्रकाश डाला। मंच पर चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल, पेक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन डॉ. राजेंद्र गुप्ता भी रहे। इस दौरान विद्यार्थियों ने रंगारंग कार्यक्रम पेश कर समा बांधा। पेक की पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।

राष्ट्रपति मंच पर पहुंचे नहीं और स्वागत की हो गई घोषणा 
शाम लगभग पौने पांच बजे सबसे पहले चंडीगढ़ प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित, हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय आदि मंच पर पहुंचे तो संचालन कर रही महिला ने गलती से बोल दिया कि राष्ट्रपति हमारे बीच पहुंच गए, उनका स्वागत है। जब पता लगा कि राष्ट्रपति नहीं यूटी के प्रशासक हैं तो फिर संचालिका ने गलती मानी। इस दौरान पंडाल में मौजूद लोग हंस पड़े। महिला संचालक की ओर से की गई स्वागत की घोषणा के कम से कम तीन मिनट बाद राष्ट्रपति मंच पर पहुंचे।
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