उन्होंने लिखा कि भले ही जनसंपर्क विभाग पर सरकार और उसकी नीतियों की छवि निर्माण की जिम्मेदारी है लेकिन इस विभाग के लिए यह जरूरी है कि वह विधानसभा कवरेज को लेकर कोई नियम बनाए, जिसमें सदन में विपक्षी सदस्यों की अनदेखी न हो। बाजवा ने विस अध्यक्ष से अनुरोध किया कि वह कार्यपालिका को विधायिका के प्रति जवाबदेह बनाने और सदन की सर्वोच्चता को बनाए रखने के लिए सदन के संरक्षक के रूप में अपने अधिकार का इस्तेमाल करें। कवरेज में भेदभाव उचित नहीं है और यह मुद्दा पहले भी कई बार उठाया जा चुका है।
गौरतलब है कि प्रताप बाजवा की तरफ से इसी मुद्दे को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई है। इस पर सात मार्च 2024 को अगली सुनवाई होगी। याचिका में बाजवा की तरफ से कहा गया है कि पंजाब सरकार द्वारा जब भी विधानसभा सत्र बुलाया जाता है तो सदन की कार्यवाही की लाइव कवरेज के दौरान कैमरे का फोकस सरकार और उसके नेताओं की तरफ रहता है। इस दौरान विपक्ष के नेताओं और उनके द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को पूरी तरह अनदेखा कर दिया जाता है। बाजवा की इस याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया हुआ है।