हरियाणा के बिजली उपभोक्ताओं को अभी बिजली कटों से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। न तो नई कंपनियों से बिजली खरदीने की प्रक्रिया में तेजी बरती जा रही है और न ही करार वाली पुरानी कंपनियों से बिजली आपूर्ति शुरू कराने में सरकार को सफलता मिली है। तेज गर्मी के चलते प्रदेश में बिजली की मांग में रोजाना इजाफा हो रहा है, लेकिन आपूर्ति का प्रबंध कहीं से नहीं हो पाया है। अगर हालात यही रहे तो आगामी दिनों में बिजली कटों की संख्या बढ़ सकती है।
मध्य प्रदेश की बिजली कंपनी से 500 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए बिजली विभाग ने सप्ताह पहले हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग को पत्र लिखकर अनुमति मांगी थी। लेकिन अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। आयोग इस मामले में 25 अप्रैल को सुनवाई करेगा, इसके बाद ही तय होगा कि खरीद पर कोई निर्णय होगा।
अडानी और टाटा कंपनी विदेशी कोयले की बढ़ी कीमतें चाह रही हैं। कंपनियों का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में विदेशी कोयले के रेट बढ़े हैं इसलिए बिजली उत्पादन करना भी महंगा हो गया है और इससे कंपनियां घाटे में चली गई है। इसे पूरा करने के लिए कोयले की बढ़ी दरें प्रदेश को देनी होगी। हालांकि, प्रदेश सरकार पहले ही इससे इनकार कर चुकी है। अभी बीच का रास्ता निकलाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ये कब सिरे चढ़ पाएंगे, कोई बता नहीं पा रहा है।
अभी स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। मात्र 1 प्रतिशत कट लगाए जा रहे हैं। नई बिजली खरीद को भी प्रक्रिया जारी है। अडानी और टाटा कंपनियों से बातचीत चल रही है, उम्मीद है कि जल्द ही मामला सुलझ जाएगा और सुचारू रूप से बिजली मिल सकेगी। -पीके दास, एसीएस, बिजली निगम।