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चंडीगढ़: दुनिया छोड़ चार को नई जिंदगी और दो को आंखों की रोशनी दे गई पूनम, जहाज से फेफड़ा चेन्नई भेजा गया

Sun, 27 Mar 2022 09:02 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पीजीआई के प्रभारी निदेशक प्रो. सुरजीत सिंह का कहना है कि जैसे ही एक व्यक्ति के लिए जीवन समाप्त होता है, यह किसी और के लिए बस शुरुआत होती है। यही है अंगदान की कड़वी सच्चाई।
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पूनम की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दुनिया छोड़कर भी पंजाब के फाजिल्का जिले के गांव गंजुवाला निवासी 32 वर्षीय पूनम रानी चार लोगों को नया जीवन और दो को नेत्र ज्योति दे गईं। पीजीआई में इलाज के दौरान ब्रेन डेड घोषित होने पर पूनम के परिजनों ने अंगदान जैसा साहसिक फैसला लेकर एक मिसाल पेश की। परिजनों की अनुमति के बाद पूनम की दोनों किडनी, लीवर व कॉर्निया को प्रतीक्षारत मरीजों में प्रत्यारोपित किया गया। पीजीआई में फेफड़े का मिलान न होने पर उसे एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाकर हवाईजहाज के जरिए चेन्नई भेजा गया। 

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पूनम को एक सर्जरी के लिए फाजिल्का के सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया था। सर्जरी के बाद उनकी हालत बिगड़ गई तो बठिंडा रेफर किया गया। स्थिति में सुधार न होने पर 20 मार्च को बठिंडा से उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ लाया गया। डॉक्टरों ने बहुत कोशिश की लेकिन हाइपोक्सिक इस्केमिक चोट के कारण उनकी स्थिति में यहां भी सुधार नहीं हुआ। पीजीआई की आंतरिक समिति ने दो बार बैठक करने के बाद 22 मार्च को पूनम को ब्रेन डेड घोषित कर दिया। 

पीजीआई के प्रभारी निदेशक प्रो. सुरजीत सिंह का कहना है कि जैसे ही एक व्यक्ति के लिए जीवन समाप्त होता है, यह किसी और के लिए बस शुरुआत होती है। यही है अंगदान की कड़वी सच्चाई। अंगदाता परिवार के लिए अपार दुख के बीच यह एक अत्यंत कठिन निर्णय था लेकिन पूनम के परिवार ने बेहद साहसिक फैसला लिया। ऐसे निर्णय से निश्चित रूप से आत्मविश्वास और आशा की किरण पैदा होती है। पूनम के परिवार जैसे उदार हृदय वाले लोगों के कारण ही हर साल सैकड़ों लोगों को जीने का दूसरा मौका मिलता है।

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अपने बेटे को छोड़ गई पर दूसरों को दे गई खुशी 
पूनम के पति प्रदीप कुमार का कहना है कि मेरे बेटे ने अपनी मां को खो दिया लेकिन उम्मीद है कि अंगदान के फैसले से कुछ बच्चों के जीवन में खुशियां लौटेंगी। हमारे एक प्रयास से शायद कुछ बच्चों के माता-पिता का जीवन बच जाए। हमारा यह प्रयास ही पूनम के लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। वहीं, पूनम के पिता हरमेश ने बताया कि पूनम बेहद दयालू थी। उसने दुनिया से जाते हुए भी दूसरों पर दया और करुणा की बरसात कर दी। उसकी इस भावना के कारण ही हम उसके अंगदान का निर्णय ले सके। 

इस तरह चेन्नई में जरूरतमंद मरीज तक पहुंचा पूनम का अंग
अंगदान की अनुमति मिलने के बाद पीजीआई की टीम ने अंगों का मिलान शुरू किया लेकिन फेफड़े के लिए प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों से मिलान नहीं हुआ। इसके बाद टीम ने राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन से संपर्क कर जरूरतमंद मरीजों और प्रत्यारोपण अस्पतालों की जानकारी मांगी। इस बीच एमजीएम हेल्थकेयर चेन्नई में भर्ती एक मरीज से फेफड़े का मिलान हो गया। इसके बाद पीजीआई से दोपहर 2.45 बजे ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पूनम के फेफड़े को एयरपोर्ट भेजा गया। यहां से अपराह्न 3.25 बजे फेफड़े ने चेन्नई के लिए उड़ान भरा। रात 8.30 बजे फेफड़ा चेन्नई पहुंच गया और उसे जरूरतमंद मरीज में प्रत्यारोपित कर दिया गया।
अंगदान को लेकर लोगों की सोच में तेजी से बदलाव आ रहा है। पीजीआई में अंग प्रत्यारोपण की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है। इसकी जागरुकता के लिए प्रत्येक व्यक्ति को सजग रहने की जरूरत है क्योंकि अंगदान के लिए किसी का किया गया छोटा सा प्रयास किसी को नया जीवन प्रदान कर सकता है।  -प्रो. विपिन कौशल, चिकित्सा अधीक्षक व रोटो के नोडर अधिकारी पीजीआई
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