अपने बेटे को छोड़ गई पर दूसरों को दे गई खुशी
पूनम के पति प्रदीप कुमार का कहना है कि मेरे बेटे ने अपनी मां को खो दिया लेकिन उम्मीद है कि अंगदान के फैसले से कुछ बच्चों के जीवन में खुशियां लौटेंगी। हमारे एक प्रयास से शायद कुछ बच्चों के माता-पिता का जीवन बच जाए। हमारा यह प्रयास ही पूनम के लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। वहीं, पूनम के पिता हरमेश ने बताया कि पूनम बेहद दयालू थी। उसने दुनिया से जाते हुए भी दूसरों पर दया और करुणा की बरसात कर दी। उसकी इस भावना के कारण ही हम उसके अंगदान का निर्णय ले सके।
इस तरह चेन्नई में जरूरतमंद मरीज तक पहुंचा पूनम का अंग
अंगदान की अनुमति मिलने के बाद पीजीआई की टीम ने अंगों का मिलान शुरू किया लेकिन फेफड़े के लिए प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों से मिलान नहीं हुआ। इसके बाद टीम ने राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन से संपर्क कर जरूरतमंद मरीजों और प्रत्यारोपण अस्पतालों की जानकारी मांगी। इस बीच एमजीएम हेल्थकेयर चेन्नई में भर्ती एक मरीज से फेफड़े का मिलान हो गया। इसके बाद पीजीआई से दोपहर 2.45 बजे ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पूनम के फेफड़े को एयरपोर्ट भेजा गया। यहां से अपराह्न 3.25 बजे फेफड़े ने चेन्नई के लिए उड़ान भरा। रात 8.30 बजे फेफड़ा चेन्नई पहुंच गया और उसे जरूरतमंद मरीज में प्रत्यारोपित कर दिया गया।
अंगदान को लेकर लोगों की सोच में तेजी से बदलाव आ रहा है। पीजीआई में अंग प्रत्यारोपण की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है। इसकी जागरुकता के लिए प्रत्येक व्यक्ति को सजग रहने की जरूरत है क्योंकि अंगदान के लिए किसी का किया गया छोटा सा प्रयास किसी को नया जीवन प्रदान कर सकता है। -प्रो. विपिन कौशल, चिकित्सा अधीक्षक व रोटो के नोडर अधिकारी पीजीआई