शोधकर्ताओं ने यह भी बताया है कि चंडीगढ़ में नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) तेजी से बढ़ा है। साल 2000 से देखें तो व्यवसायिक क्षेत्र में 1.1 फीसदी, इंस्टीट्यूशनल में 24.8 फीसदी, औद्योगिक में 27.4 फीसदी, रिहायशी इलाकों में 20.1 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 20.9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
नाइट्रोजन ऑक्साइड का बढ़ना चिंताजनक हो सकता है, क्योंकि पीएम 2.5 में इसका काफी हिस्सा होता है। शीतकाल में पराली जलाने से उत्पन्न धुआं नाइट्रोजन उत्सर्जन का महत्वपूर्ण सोर्स माना गया है। इससे बच्चों व बड़ों में सांस की बीमारी बढ़ने की संभावना ज्यादा रहती है।
मानसून के सीजन में प्रदूषण के स्तर में आती है काफी कमी
मानसून सीजन चंडीगढ़ के लिए न सिर्फ गर्मी बल्कि प्रदूषण के लिए भी राहत लेकर आता है। जून से लेकर सितंबर तक पीएम 10 के स्तर में 47-67 फीसदी व नाइट्रोजन आक्साइड में 38 से 57 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। बारिश से कण नीचे आते हैं और बह जाते हैं। सबसे अधिक प्रदूषण दिसंबर के महीने में दर्ज किया गया है, क्योंकि इस महीने में वायुमंडलीय सतह नीचे आती है और कण ऊपर जाने के बजाय नीचे रहते हैं।
पीएम 2.5 व पीएम 10 हवा में कण के साइज को बताता है। आम तौर पर हमारे शरीर के बाल पीएम 50 के साइज के होते हैं। इससे आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीएम 2.5 कितने बारीक होते होंगे।
सरकार ने नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम लांच किया है। इसके तहत प्रदूषण के स्तर में 25 से 30 फीसदी की कमी लाना है। यह अध्ययन चंडीगढ़ के प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद करेगा। इससे प्रदूषण के प्रवृत्ति का पता चलता है। - रविंद्रा खैवाल, एसोसिएट प्रोफेसर, कम्युनिटी मेडिसिन एंड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई
लोगों के सहयोग के बिना चंडीगढ़ के प्रदूषण को नियंत्रित नहीं किया जा सकता। हालांकि, लोगों का पर्यावरण के प्रति झुकाव बढ़ा है। साइकिलिंग और वेस्ट सेग्रिगेशन में लोगों की भूमिका बढ़ी है। - डॉ. सुमन मोर, एसोसिएट प्रोफेसर एनवायरनमेंट स्टडीज पीयू