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Haryana Panchayat Election: तैयार हुआ सियासी अखाड़ा, एक माह से अधिक चढ़ा रहेगा राजनीति का पारा

Sat, 08 Oct 2022 12:56 PM IST
निवेदिता वर्मा यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

जिला परिषद, पंचायत समिति चेयरमैन और सरपंचों का ग्रामीण क्षेत्र के विकास में अहम योगदान रहता है। केंद्र व प्रदेश सरकार लगभग 70 फीसदी बजट सीधे पंचायतों को ही भेजती है। जिला परिषद और पंचायत समिति को 20 और 10 प्रतिशत बजट ही आता है।
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पंचायत चुनाव। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पंचायती राज चुनाव की घोषणा के साथ ही हरियाणा में सियासी अखाड़ा तैयार हो गया है। एक महीने से अधिक समय तक प्रदेश का राजनीतिक तापमान चढ़ा रहेगा। पहले चरण का चुनाव 2 नवंबर को संपन्न होगा, जबकि दूसरे चरण का मतदान भी 15 नवंबर तक कराने की तैयारी है। कांग्रेस यह चुनाव सिंबल पर नहीं लड़ेगी। इनेलो और आप ने जिला परिषद चुनाव सिंबल पर लड़ने का निर्णय लिया है। भाजपा-जजपा जल्दी सिंबल पर चुनाव लड़ने का निर्णय लेंगी।

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गठबंधन सरकार के लिए यह चुनाव नाक का सवाल है। सरकार 22 जिला परिषद चेयरमैन की अधिकतर सीटें कब्जाना चाहेगी। चुने हुए सदस्यों को ही जिला परिषद चेयरमैन का चुनाव करना है, इसलिए भाजपा-जजपा अपने अधिक-अधिक से अधिक जिला परिषद जिताना चाहेंगी। 143 पंचायत समिति की चेयरमैनी के लिए भी दलों में खूब जोर-आजमाइश होगी, भले ही पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव पार्टियां सिंबल पर न लड़ें।

जिला परिषद, पंचायत समिति चेयरमैन और सरपंचों का ग्रामीण क्षेत्र के विकास में अहम योगदान रहता है। केंद्र व प्रदेश सरकार लगभग 70 फीसदी बजट सीधे पंचायतों को ही भेजती है। जिला परिषद और पंचायत समिति को 20 और 10 प्रतिशत बजट ही आता है। सरपंच ही पंचायतों में अधिकतर काम करवाकर ग्रामीण मतदाताओं को प्रभावित करते हैं। उसके बाद लोगों के साथ सबसे अधिक जुड़ाव जिला परिषद और उसके बाद पंचायत समिति सदस्य का रहता है।

ग्रामीण विधायकों के लिए अग्निपरीक्षा

सरपंच, पंच और पंचायत समिति सदस्य का चुनाव इसलिए ही दल सिंबल पर नहीं लड़ते, चूंकि यह भाईचारे का चुनाव होता है। इसमें एक ही दल के अनेक कार्यकर्ता चुनाव में उतरते हैं। भाई के खिलाफ भाई और सगे संबंधी तक चुनाव लड़ते हैं। सामाजिक तानाबाना न बिगड़े इसलिए नेता इसमें ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करते, चूंकि इस चुनाव की खुन्नस हारे हुए उम्मीदवार विधानसभा चुनाव में निकालते हैं। ग्रामीण विधायकों के लिए यह चुनाव अग्निपरीक्षा है। उनकी 2022 विधानसभा चुनाव की दशा और दिशा काफी हद तक इससे तय होगी। ग्रामीण मतदाताओं का रूझान भी सामने आएगा।

सरकार चुनाव के लिए तैयार : मनोहर लाल

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि सरकार पंचायत चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है। राज्य चुनाव आयोग ने घोषणा कर दी है। आदर्श आचार संहिता का पूरा पालन कराया जाएगा। जल्द ही पार्टी की बैठक होगी, जिसमें जिला परिषद चुनाव सिंबल पर लड़ने का निर्णय होगा। जजपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने का फैसला पार्टी आलाकमान करेगा। जिला परिषद चुनाव सिंबल पर लड़ते हैं विकास ही मुद्दा होगा। प्रदेश में विकास के नए आयाम लिखे गए हैं।

निर्दलीयों पर दांव खेलेगी कांग्रेस

नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सिंबल पर यह चुनाव लड़ती ही नहीं। जिप चेयरमैन का चुनाव सरकार सीधे करवाती तो लड़ते और गठबंधन को बता देते धरातल पर उनकी क्या स्थिति है। कांग्रेस पंचायत चुनावों के लिए पूरी तरह से तैयार है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष उदयभान ने कहा कि जिला परिषद व ब्लॉक समिति के जिताऊ उम्मीदवारों का समर्थन किया जाएगा। प्रदेश सरकार के खिलाफ गांवों में बने माहौल का निर्दलीय उम्मीदवारों को फायदा मिलेगा।

इनेलो को बेहतर प्रदर्शन की आस

इनेलो विधायक व प्रधान महासचिव अभय चौटाला ने कहा कि जिला परिषद चुनाव सिंबल पर लड़ने जा रहे हैं। पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में उन्हें जनता का भरपूर समर्थन मिलेगा। जनता महंगाई, बेरोजगारी, अपराध इत्यादि से तंग आ चुकी है। सरकार की विफलताओं को मुद्दा बनाएंगे। किसान बेहाल है। पंचायतों में पौने दो साल विकास कार्य ठप रहे, भ्रष्टाचार चरम पर जा पहुंचा। ग्रामीण बदलाव को तैयार बैठे हैं।

जजपा जल्द लेगी चुनाव पर निर्णय : दुष्यंत

डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने कहा कि चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। गठबंधन में चुनाव लड़ने का फैसला समन्वय समिति करेगी। चुनाव की घोषणा हो चुकी है, जल्दी तस्वीर साफ हो जाएगी। ग्रामीण विकास सरकार की प्राथमिकता रही है, बड़े पैमाने पर गांवों की दशा सुधरी है।

ताकत, कमजोरी, अवसर, चुनौती

भाजपा : शहरी पार्टी होने का ठप्पा बड़ी कमजोरी। गांवों में पैठ मजबूत करना चुनौती। जिला परिषद चुनाव में जीत 2022 के लिए अच्छा मौका। मजबूत संगठन बड़ी ताकत।

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कांग्रेस : धरातल पर संगठन न होना मुख्य कमजोरी। गांवों में पुरानी पैठ होना ताकत। ताकत परखने का यह अच्छा अवसर था, ग्रामीण मतदाताओं को जोड़ना चुनौती बनेगा।
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आप : जमीनी स्तर पर काम। पूरे प्रदेश में संगठन न होना कमजोरी। जिला परिषद जीतकर चौंकाने का अवसर। अच्छे प्रदर्शन की चुनौती
इनेलो : ग्रामीणों में अच्छी पकड़। संगठन में बिखराव। बेहतर प्रदर्शन कर माहौल बनाने का अवसर। जिला परिषद सीटें जीतना चुनौती

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