हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर से एक अलग ही तस्वीर निकल कर आती है। साल 2009 विधानसभा चुनाव में चुनकर आए विधायकों को मिले वोट पर नजर डालें तो नौ ऐसे विधायक हैं, जो महज 20 फीसदी मत लाकर चुनाव जीत गए।
83 ऐसे विधायक हैं, जिन्हें 40 प्रतिशत से भी कम वोट मिले हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा एक मात्र ऐसे विधायक हैं, जिन्हें 55 प्रतिशत से अधिक वोट मिले।
राजनीतिक दलों के वोटिंग शेयर पर नजर डाले तो कांग्रेस के 37 विधायकों को कुल वोटों में से 40 प्रतिशत से भी कम मत मिले थे। इनेलो की हालत भी कुछ ऐसी थी। 31 में से 28 विधायकों को 40 प्रतिशत से भी कम वोट मिले थे।
ऐसा कहना है विशेषज्ञों का
पंजाब यूनिवर्सिटी के राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर आशुतोष का कहना है कि हरियाणा में सभी पार्टियों का अपना जनाधार है। टारगेट वोट है। जब ऐसी स्थिति बनती है तो जीत का अंतर काफी कम हो जाता है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान की स्थिति अलग है। वहां पर दो ही पार्टियां हैं बीजेपी और कांग्रेस है, इसीलिए जीत का अंतर भी वहां ज्यादा होता है। इस बार के चुनाव में तो जीत का अंतर काफी कम होने वाला है, क्योंकि बीजेपी भी उत्साहित है।
जाहिर सी बात है कि बीते चुनाव की अपेक्षा इस बार उसके जनाधार में थोड़ी बहुत तो बढ़ोतरी जरूर होगी। इस बार तो ऐसा लग रहा है कि कई विधायक ऐसे चुनकर आएंगे, जिन्हें 12-15 प्रतिशत वोट मिलेंगे और अपनी विधानसभा का नेतृत्व करेंगे।
2009 में चुनी गई विधानसभा की तस्वीर
विधायकों का प्रतिशत----------------विधायकों की संख्या
20 प्रतिशत से भी कम वोट मिले-----------09
20-29 प्रतिशत के बीच मिले मत----------48
30-39 प्रतिशत के बीच मिले मत----------26
40-49 प्रतिशत के बीच मिले मत----------6
50 प्रतिशत व उससे ज्यादा मिले मत--------1